ब्रह्मा जी के आंसू से हुआ था इस चमत्कारी फल का जन्म...आज पूजा करने से मिलता है सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद

Akshaya Navmi 2025: कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन अक्षय नवमी का पर्व मनाया जाता है और इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करना शुभ व फलदायी माना गया है.

Published date india.com Published: October 31, 2025 1:20 PM IST
ब्रह्मा जी के आंसू से हुआ था इस चमत्कारी फल का जन्म...आज पूजा करने से मिलता है सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद

Akshaya Navmi 2025: सनातन धर्म में हर दिन का एक खास महत्व माना गया है और कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि बहुत ही महत्वपूर्ण मानी गई है. इस दिन अक्षय नवमी का पर्व मनाया जाता है जिसे आंवला नवमी भी कहते हैं और इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करना बहुत ही शुभ माना जाता है.​ हिंदू धर्म में जिस तरह तुलसी के पौधा पूजनीय माना गया है उसी प्रकार आंवले के पेड़ की पूजा करने से भी पुण्य फल की प्राप्ति होती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आंवले का फल ब्रह्मा जी के आंसू से उत्पन्न हुआ है?

कैसे हुई आंवले की उत्पत्ति?

पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान जब​ विष निकला तो उसकी कुछ बूंदे धरती पर छलकी और उससे भांग व धतूरा जैसी बूटियों का जन्म हुआ. वहीं समुद्र मंथन के दौरान अमृत भी निकला और जब अमृत धरती पर छलका तो उससे आंवला जैसे गुणकारी पौधे का जन्म हुआ.

एक अन्य मान्यता के अनुसार एक बार पूरी धरती जलमग्न हो गई थी और उसी समय ब्रह्मा जी कमल के फूल पर बैठकर परब्रह्म की तपस्या में लीन थे. परमब्रह्म की भक्ति में ब्रह्मा जी इतने लीन थे प्रेम व अनुराग में उनकी आंखों से आंसू टपकने लगे. उस भक्ति भरे आंसू के टपकने से आंवला का पेड़ उत्पन्न हुआ और इसलिए इसे चमत्कारी फल कहा जाता है.

गुणों की खान है आंवला

हिंदू धर्म में आंवले के पेड़ का पूजन किया जाता है और वहीं आयुर्वेद में इसके कई चमत्कारी गुण भी बताए गए हैं. आंवला नवमी व आंवला एकादशी के दिन आंवले की पूजा करने का विधान है. आंवला का फल आयरन और विटामिन सी से भरपूर है. इस फल का सेवन करने से कई प्रकार की बीमारियों से छुटकारा मिलता है.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.

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