Amla Navami 2025: अक्षय नवमी के दिन मां लक्ष्मी ने खुद की थी आंवले की पूजा...फिर हुई सतयुग की शुरुआत, यहां पढ़ें पौराणिक कथा

Amla Navami 2025: आंवला नवमी यानि अक्षय तृतीया के दिन आंवले के पेड़ का पूजन किया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन आंवले का पूजन करने से पुण्य की प्राप्ति होती है.

Published date india.com Published: October 31, 2025 10:56 AM IST
Amla Navami 2025: अक्षय नवमी के दिन मां लक्ष्मी ने खुद की थी आंवले की पूजा...फिर हुई सतयुग की शुरुआत, यहां पढ़ें पौराणिक कथा

Amla Navami 2025: हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन आंवला नवमी यानि अक्षय नवमी का पर्व मनाया जाता है. इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है और ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं. इस साल आंवला नवमी का पर्व आज यानि 31 अक्टूबर को मनाया जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सबसे पहले आंवले के पेड़ की पूजा मां लक्ष्मी ने की थी और इसके ​बाद ही आंवला के पेड़ को पूजनीय स्थान मिला है. आइए जानते हैं आंवला नवमी ​यानि अक्षय नवमी से जुड़ी पौराणिक कथा के बारे में.

मां लक्ष्मी ने की थी पहले आंवले की पूजा

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार मां लक्ष्मी धरती पर भ्रमण के लिए आई और इस दौरान उनके मन में भगवान विष्णु व भगवान शिव की पूजा करने की इच्छा प्रकट हुई. लेकिन फिर उनके मन में सवाल आया कि आखिर विष्णु और शिवजी की पूजा धरती पर एक साथ कैसे की जा सकती है? तब मां लक्ष्मी को विचार आया आंवले का पेड़ एकमात्र एक ऐसा पेड़ है जिसमें तुलसी और बेल दोनों के गुण पाए जाते हैं.

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फिर हुई सतयुग की शुरुआत

मन में यह विचार आते ही मां लक्ष्मी ने आंवले के पेड़ को विष्णु जी और शिवजी का प्रतीक मानकर विधि-विधान से पूजन किया. जिससे प्रसन्न होकर विष्णु जी और शिवजी दोनों प्रकट हुए. फिर मां लक्ष्मी ने वहीं आंवले के पेड़ के नीचे भोजन बनाया और भगवान शिव व भगवान विष्णु को भोजन कराया. कहते हैं कि इसी दिन से सतयुग भी शुरू हुआ. तभी से अक्षय नवमी यानि आंवला नवमी के दिन आंवले के पेड़ का पूजन करना पुण्यकर्म माना गया है.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.

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