Lord Hanuman: हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान राम के प्रिय भक्त हनुमान जी का नाम लेने से ही जीवन में आ रहे सभी संकट दूर हो जाते हैं. यही वजह है कि हनुमान जी को संकटमोचन भी कहा गया है और भक्त उनकी कृपा पाने के लिए उनका पूजन व उपासना करते हैं. मान्यता है कि जिस पर बजरंबली की कृपा होती है उसके जीवन से रोग, दोष, कष्ट व भय दूर हो जाते हैं. भगवान राम तक उनके भक्तों की मनोकामनाएं पहुंचाने वाले भी हनुमान जी ही होते हैं. यह भी कहा जाता है कि जहां राम कथा होती है वहां आज भी एक स्थान बालाजी यानि हनुमान के लिए छोड़ा जाता है.
इस पहाड़ी पर मिलते हैं हनुमान जी
हनुमान जी जन्म को लेकर कई कहानियां व मान्यताएं प्रचलित हैं. देश के कई हिस्सों को उनकी जन्म स्थली माना जाता है. जिसमें महाराष्ट्र से लेकर झारखंड तक कई जगहें शामिल हैं. आज हम 516 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हम्पी की पहाड़ी पर बसे प्राचीन स्थल की बात कर रहे हैं. कर्नाटक के हम्पी के कोप्पल जिले के गंगावती तालुका के आनेगुंडी कस्बे की सीमा पर अंजनाद्रि पहाड़ी की चोटी पर हनुमान जी का प्राचीन मंदिर आज भी मौजूद है, जिसे उनकी जन्मस्थली माना जाता है. कुछ कथाओं के अनुसार यह वो स्थान है जिसका संबंध वानर राज बाली और सुग्रीव के साम्राज्य से है. कहते हैं कि इसी जगह हनुमान जी ने सुग्रीव और प्रभु श्रीराम की पहली मुलाकात करवाई थी.
इस पहाड़ी की चोटी पर बसे हनुमान जी के मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 462 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. चोटी से हम्पी के स्मारकों और तुंगभद्रा नदी का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है. इस पहाड़ी से सूर्योदय और सूर्यास्त का भी बेहद खूबसूरत नजारा दिखाई पड़ता है. मंदिर तक पहुंचने की सीढ़ियां बहुत छोटी हैं और खड़ी चढ़ाई के साथ पर्वत को काटकर बनाई गई हैं. यही वजह है कि भक्तों के लिए यहां की यात्रा करना बहुत मुश्किल है.
पौराणिक कथा के अनुसार, इस पहाड़ी का नाम हनुमान की माता अंजना देवी के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने वानर योद्धा केसरी से विवाह करने के बाद यहां निवास किया था. किंवदंती है कि हनुमान जी का जन्म भी इसी पर्वत पर ही हुआ था और इसी पहाड़ी से छलांग लगाकर उन्होंने सूर्य को निगल लिया था. स्थानीय लोक कथाओं के अनुसार, हनुमान जी को पंपा क्षेत्र में भगवान शिव का दिव्य अवतार माना जाता है. यहां हर साल हनुमान जन्मोत्सव बहुत धूमधाम से मनाया जाता है.
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