Ashadha Amavasya 2020 Date and Timing: आज 21 जून को आषाढ़ अमावस्या है. इसी दिन इस साल का पहला सूर्यग्रहण भी पड़ रहा है. आषाढ़ मास की कृष्ण पक्ष की इस अमावस्या को स्नान दान अमावस्या भी कहा जाता है. स्नान दान अमावस्या हर महीने आती है, और इस महीने ये अमावस्या 21 जून को है. इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व होता है. यह एक महत्वपूर्ण दिन होता है क्योंकि कई धार्मिक कृत्य केवल अमावस्या तिथि के दिन ही किये जाते हैं. पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति के लिए अमावस्या के सभी दिन श्राद्ध की रस्मों को करने के लिए उपयुक्त हैं. कालसर्प दोष निवारण की पूजा करने के लिए भी अमावस्या का दिन उपयुक्त होता है. अमावस्या को अमावस या अमावसी के नाम से भी जाना जाता है.

आज साल का पहला सूर्य ग्रहण है जिसका सूतक काल ग्रहण से 12 घंटे पहले लग जाएगा. इस दौरान सुबह स्नान , पूजा पाठ और दान नहीं किया जाता है. इसलिए आप ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान कर सकते हैं और दान भी दे सकते हैं. अमावस्या जब सोमवार के दिन पड़ती है तो उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं और अमावस्या जब शनिवार के दिन पड़ती है तो उसे शनि अमावस्या कहते हैं. अमावस्या को पितरों के देवता की पूजा होती है और इसलिए इस दिन पितरों को प्रसन्न करने के लिए गाय के गोबर से बन उपले में घी और गुड़ मिला कर जलाने की विधान होता है। साथ ही हथेली पर पानी लेकर अंगूठे से उसे धरती पर छोड़ना होता है. इससे पितरों का तर्पण होता है और वह प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं.

आषाढ़ अमावस्या (Ashadha Amavasya 2020 )तिथि व मुहूर्त
अमावस्या तिथि – 21 जून 2020
अमावस्या तिथि आरंभ – सुबह 11 बजकर 52 मिनट (20 जून 2020) से
अमावस्या तिथि समाप्त – दोपहर दोपहर 12 बजकर 10 मिनट (21 जून 2020) तक

आषाढ़ अमावस्या का महत्व
हिन्दू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास हिंदू वर्ष का चौथा महीना होता है. इस महीने की समाप्ति के बाद वर्षा ऋतु शुरू होती है. आषाढ़ अमावस्या दान-पुण्य व पितरों की आत्मा की शांति के लिये किए जाने वाले धार्मिक कर्मों के लिए विशेष फलदायी मानी गई है. इस दिन पवित्र नदी और तीर्थ स्थलों पर स्नान का कई गुना फल मिलता है. धार्मिक रूप से अमावस्या तिथि का बहुत अधिक महत्व माना जाता है.