Ashadha Month 2026: शुरू हुआ आषाढ़, क्या करें और क्या नहीं? शास्त्रों के अनुसार जानें आषाढ़ महीने के 5 कड़े नियम
Ashadha Month 2026 Do's and Don'ts: आषाढ़ का महीना शुरू हो चुका है. शास्त्रों के अनुसार इस महीने में चातुर्मास के 5 कड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य माना गया है. जानिए आषाढ़ मास में क्या करें और क्या नहीं.
चातुर्मास के नियम
शुभ कार्य बंद: देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू होने के कारण सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है.
साग खाना मना: मानसून में बैक्टीरिया बढ़ने के कारण आषाढ़ से हरी पत्तेदार सब्जियां खाना वर्जित होता.
सूर्य देव की पूजा: रोज सुबह सूर्य को अर्घ्य दें और जरूरतमंदों को छाता, सत्तू या जल दान करें.
सात्विक खान-पान: पाचन क्रिया धीमी होने के कारण मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज से पूरी तरह दूरी बनाएं.
Ashadha Month 2026: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, ज्येष्ठ मास की समाप्ति के बाद आषाढ़ महीने की शुरुआत होती है. यह सनातन धर्म का चौथा महीना है, जिसे वर्षा ऋतु के आगमन, आध्यात्मिक साधना और संयम का काल माना जाता है. इसी महीने में देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं, जिससे 'चातुर्मास' की शुरुआत होती है.
शास्त्रों में आषाढ़ के महीने को लेकर कुछ बेहद कड़े और जरूरी नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करने से सेहत अच्छी रहती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. आइए जानते हैं आषाढ़ मास के 5 कड़े नियम और क्या करें, क्या न करें.
आषाढ़ महीने के 5 कड़े नियम
- मांगलिक कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध
आषाढ़ मास की देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन के लिए चले जाते हैं. शास्त्रों के अनुसार, इस अवधि के बाद से अगले चार महीनों तक विवाह, मुंडन, जनेऊ संस्कार और गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक व शुभ कार्य पूरी तरह वर्जित हो जाते हैं.
- हरी पत्तेदार सब्जियों का पूर्ण त्याग
शास्त्रों और आयुर्वेद दोनों में आषाढ़ के महीने से हरी पत्तेदार सब्जियां खाना सख्त मना है. मानसून की शुरुआत के कारण इस मौसम में पत्तों पर बैक्टीरिया और कीड़े-मकौड़े पनपने लगते हैं, जिससे पेट की बीमारियां होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है.
- तामसिक भोजन और मदिरा से दूरी
वर्षा ऋतु में इंसान की जठराग्नि मंद पड़ जाती है. इसलिए इस महीने मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज और मसूड़ की दाल जैसे तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए. ऐसा करने से शारीरिक और मानसिक अशुद्धि बढ़ती है.
- सूर्योदय के बाद सोने की मनाही (आलस्य का त्याग)
आषाढ़ मास के मुख्य देवता सूर्य देव और मंगल माने जाते हैं. इस महीने में जो लोग सूर्योदय के बाद तक सोते हैं, उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और कुंडली में सूर्य दोष लगता है. इस महीने ब्रह्म मुहूर्त में उठना अनिवार्य माना गया है.
- जल की बर्बादी न करना
आषाढ़ चूंकि बादलों और पहली बारिश का महीना है, इसलिए शास्त्रों में इस महीने जल को भगवान वरुण का साक्षात रूप मानकर उसकी बर्बादी को महापाप माना गया है. पानी का अपव्यय करने से आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है.
आषाढ़ में क्या करें?
विष्णु और शिव की आराधना: इस पूरे महीने भगवान विष्णु के वामन रूप की पूजा करें. साथ ही, चूंकि चातुर्मास शुरू होता है, इसलिए भगवान शिव का जलाभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना सर्वोत्तम फल देता है.
सूर्य देव को अर्घ्य: रोज सुबह तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और अक्षत डालकर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दें. इससे मान-सम्मान और ऊर्जा में वृद्धि होती है.
विशेष वस्तुओं का दान: आषाढ़ के मौसम को देखते हुए जरूरतमंदों को छाता, खड़ाऊ (चप्पल), नमक, सत्तू, आंवला और पानी से भरे घड़े का दान करने से पितृ दोष शांत होता है.
एक समय भोजन और व्रत: यदि संभव हो तो इस महीने में केवल एक समय सात्विक भोजन करें. इससे पाचन तंत्र ठीक रहता है और आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है.
आषाढ़ में क्या न करें?
बासी और अत्यधिक तैलीय भोजन: इस मौसम में संक्रमण बहुत तेजी से फैलता है, इसलिए बासी खाना या बहुत ज्यादा तेल-मसाले वाली चीजों से दूर रहें.
गुरु और बुजुर्गों का अपमान: इस महीने में गुरु पूर्णिमा आती है. शास्त्रों के अनुसार, आषाढ़ में भूलकर भी अपने गुरु, माता-पिता या किसी संत का अपमान नहीं करना चाहिए, अन्यथा भाग्य का साथ मिलना बंद हो जाता है.
उधार लेनदेन से बचें: शास्त्रों के अनुसार, आषाढ़ मास में बिना सोचे-समझे बड़ा कर्ज लेने या देने से बचना चाहिए, क्योंकि इस समय शुरू हुआ वित्तीय तनाव लंबे समय तक खिंच सकता है.
आषाढ़ का महीना हमें सिखाता है कि जब बाहरी दुनिया के भौतिक और मांगलिक कार्यों पर विराम लगता है, तो वह समय अपनी सेहत को सुधारने, गुरु की शरण में जाने और अपनी आत्मिक ऊर्जा को जगाने का होता है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.
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