
Neha Awasthi
नेहा अवस्थी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 18 सालों का अनुभव है. नेहा टीवी और डिजिटल दोनों माध्यमों की जानकार हैं. इन 18 सालों में इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों ... और पढ़ें
Astrology Prediction, Exclusive: क्या सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना महज एक राजनीतिक उलटफेर है या ग्रहों की पूर्व-निश्चित चाल? वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य प्रतापशील से हुई विशेष बातचीत के आधार पर जानिए, कैसे शनि की महादशा और राहु-केतु के दुर्लभ संयोग ने सम्राट चौधरी का राजतिलक तय कर दिया.
बिहार की राजनीति में 14 अप्रैल 2026 का दिन एक बड़े बदलाव का गवाह बना. सम्राट चौधरी आखिरकार बिहार के मुख्यमंत्री बन ही गए. सबसे कमाल की बात यह है कि उनके मुख्यमंत्री बनने की खबरें जैसे ही सामने आयी,इंटरनेट की दुनिया में, यूट्यूब की दुनिया में तमाम ज्योतिष अपनी-अपनी भविष्यवाणी करने लगे हैं. कोई कह रहा है कि फलाना ग्रह की दशा थी, अंतर्दशा थी, तो कोई कह रहा है कि ‘मैं तो पहले ही कहा था कि यह बन जाएंगे’ और देखिए यह बन गए.
इसमें सबसे कमाल की बात यह है कि सम्राट चौधरी का वास्तविक जन्म का समय किसी भी ज्योतिष के पास नहीं है. उनकी डेट ऑफ बर्थ और जगह उपलब्ध है, जिसके अनुसार उस दिन की चंद्र कुंडली बनाई जा सकती है और उससे भी फलित किया जा सकता है लेकिन शायद ज्योतिष करने वाले अधिकांश लोग इस सच को नहीं स्वीकार करना चाहते कि उनके पास उनका वास्तविक बर्थ डाटा नहीं है, इसलिए वे तरह-तरह की लग्न कुंडली बनाकर फलित करने का प्रयास कर रहे हैं. जब कोई घटना हो जाती है, तो उसे साबित करना ज्योतिष में बड़ा ही आसान हो जाता है.
वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य प्रतापशील के साथ हुई विशेष चर्चा में हमने उनकी लग्न कुंडली को जानने के बजाय, उस दिन की चंद्र कुंडली (16 नवंबर 1968, मुंगेर) के आधार पर फलित करने का प्रयास किया है, ताकि जाना जा सके कि क्या ऐसी दशाएं सही में थीं जो उन्हें इस टॉप मोस्ट पोस्ट तक पहुंचा पातीं.
अक्सर लोग इस उलझन में रहते हैं कि बिना सटीक जन्म समय (Birth Time) के कुंडली कैसे देखी जा सकती है. ज्योतिषाचार्य प्रतापशील बताते हैं कि भारतीय ज्योतिष में ‘चंद्र कुंडली’ का विशेष महत्व है. जहाँ लग्न कुंडली के लिए सटीक समय की आवश्यकता होती है, वहीं चंद्र कुंडली केवल जन्म तिथि और जन्म स्थान के आधार पर बनाई जा सकती है क्योंकि चंद्रमा एक राशि में लगभग सवा दो दिन तक रहता है. ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को ‘मन’ और ‘भाग्य के भोग’ का कारक माना गया है. यदि किसी व्यक्ति की चंद्र कुंडली मजबूत है और ग्रहों का गोचर उसके अनुकूल है, तो वह बिना लग्न कुंडली के भी जीवन में बड़ी सफलताएँ और राजयोग प्राप्त करता है. सम्राट चौधरी के मामले में, उनकी चंद्र कुंडली में ग्रहों का यही प्रबल संयोग उनकी सफलता का मुख्य आधार बना है.
चंद्र कुंडली बताती है कि सम्राट चौधरी का कन्या लग्न है, मतलब चंद्रमा कन्या राशि में बैठे हुए हैं. वे किसके साथ बैठे हैं मंगल के साथ, गुरु के साथ और केतु के साथ. मतलब ठीक सामने वाले भाव में राहु विराजमान है. कन्या लग्न की कुंडली के लिए शनि योगकारक होते हैं क्योंकि वे त्रिकोण के स्वामी होते हैं. शुक्र भी बहुत अच्छे ग्रह होते हैं क्योंकि वे भी त्रिकोण के स्वामी होते हैं. बुध तो अच्छे ग्रह होते ही हैं क्योंकि वे लग्नेश हैं और साथ में दशम भाव (10th Lord) के स्वामी भी हैं. लग्नेश होने का मतलब है कि जो ग्रह व्यक्ति को आगे ले जाता है, ऊपर ले जाता है और तरक्की कराता है, जो व्यक्ति के अंदर अपने आप को टॉप मोस्ट पोजीशन पर ले जाने की क्षमता रखता है. बुद्ध यहाँ दशमेश (Career Lord) भी हैं, जो आपको कार्यक्षेत्र में ऊंचाइयों पर लेकर जाते हैं. शनि पंचम त्रिकोण के स्वामी होकर व्यक्ति को यश, मान-सम्मान आदि दिलाने की जिम्मेदारी रखते हैं और शुक्र (नवम भाव के स्वामी) भाग्य भाव और प्रारब्ध को बढ़ाने का काम करते हैं और जीवन में अवसर लेकर आते हैं.
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सबसे बड़ी बात है कि अगर इस कुंडली को कोई देखेगा तो एक नजर में बोलेगा कि इसमें कालसर्प योग भी बनता है लेकिन कालसर्प योग बनने के कई सारे नियम हैं, जिसको नहीं जानने के कारण लोग इसे बुरा बोलने लगते हैं या डरने लगते हैं. ज्योतिषाचार्य प्रतापशील स्पष्ट करते हैं कि इनकी कुंडली में कालसर्प योग विजिबल तो हो सकता है, लेकिन वास्तव में नेगेटिव इम्पैक्ट करने वाला कालसर्प योग बिल्कुल भी नहीं बन रहा है.
वर्तमान में इनकी दशा चल रही है शनि की और शनि महादशा में बुध की अंतर्दशा चल रही है.
कुल मिलाकर अगर आप देखेंगे, तो यह एक बड़ा अच्छा राजयोग बना हुआ है और यह दशा भी जो चल रही है, वह एक राजयोग की दशा चल रही है. इसी समय ने श्री सम्राट चौधरी जी को एक ऊंचाई पर पहुँचाया और उन्हें बिहार का मुख्यमंत्री बनाया.
ज्योतिषाचार्य प्रतापशील एक पत्रकार भी रहे हैं उनका कहना है कि ‘क्योंकि मैं पत्रकार भी रहा हूँ, इसलिए मैं यह तो बिल्कुल नहीं कहूँगा कि बाकी सारे योग नहीं थे.पार्टियों के अपने योग, कॉम्बिनेशन और समीकरण भी रहे होंगे. बहुत सारे लोग दौड़ में भी होंगे, लेकिन आखिरकार उस दौड़ में जीतेगा कौन? जिसकी कुंडली ज्यादा प्रबलता से, ज्यादा मजबूती से और ज्यादा बल के साथ उन अवरोधों को पार करने में कामयाब हो जाएगी’.
चूंकि सम्राट चौधरी की कुंडली बलवान है और अच्छे ग्रहों की दशाएं चल रही हैं, इसलिए बाकी दावेदारों के बीच इन्होंने इस ‘राजनीतिक चक्रव्यूह’ को भेद डाला. शनि और राहु के सहयोग ने उनके इस राजयोग को चरम पर पहुँचा दिया, जिसने बिहार की सत्ता की कुर्सी उन्हें थमा दी.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.
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