नई दिल्ली:  ज्योतिष शास्त्र में राहु और केतु को काफी खतरनाक ग्रह माना जाता है. यह ग्रह अगर किसी की कुंडली में आते हैं तो इस के परिणाम अशुभकारी होते हैं. जिस व्यक्ति की कुंडली में भी राहु और केतु होते हैं उसे काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. राहु केतु के दुष्प्रभावों से बचने के लिए ज्योतिष शास्त्र में कुछ खास उपाय बताए गए हैं. जिन्हें आजमाने से व्यक्ति इनके दुष्प्रभावों से बच सकता है. आज हम आपको कुछ ऐसे उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनसे आप इनके दुष्प्रभानों से बच सकते हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में-

– मां दुर्गा को छायारूपेण कहा जाता है. ऐसे में दुर्गा पूजा करने से राहु और केतु के दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है.

– राहु-केतु के दुष्प्रभावों से बचने के लिए नाग पर नाचते हुए श्रीकृष्ण की मूर्ति की पूजा करनी चाहिए और साथ ही 108 बार ओम नम: भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करने से शुभ फल मिलते हैं.

– राहु-केतु के शुभ फलों की प्राप्ति के लिए इनके बीज मंत्रों का जाप करना चाहिए. इससे सभी मुश्किलें हल हो जाती हैं.

– राहु-केतु के दुष्प्रभावों से बचने के लिए राहु और केतु की 18-18 शनिवार को पूजा करनी चाहिए. साथ ही उनके प्रिय रत्न गोमेद और लहसुनिया का दान भी करना चाहिए.

– केतु की शांति के लिए बुधवार या गुरुवार को अश्वगंध की जड़ के टुकड़े को आसमानी रंग के कपड़े में धारण करना चाहिए.