नई दिल्ली: 22 अगस्त को ईद-उल-अजहा है. इसकी तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. बाजार लगे हुए हैं. बकरों की खरीदारी चल रही है. घरों में भी तैयारियां चल रही हैं. अक्सर आपने सुना होगा कि पूछा जाता है कि क्या मीट (गोश्त) हलाल है. ये भी सवाल आता है कि कुर्बानी आखिर किन मुसलामानों पर वाजिब (अनिवार्य) है. कुर्बानी कैसे दी जाती है. ईद-उल-अजहा के मौके पर India.com इन सवालों से जुड़ी बातें और मान्यताएं बता रहा है.Also Read - अरब देशों में भारत का डंका, 15 साल में पहली बार ब्राजील को पछाड़कर बना नंबर 1 फूड सप्लायर

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किन मुस्लिमों पर वाजिब है कुर्बानी Also Read - Pakistani आतंकी ने हैरान करने वाले राज उगले, इंडियन पासपोर्ट से विदेश यात्राएं की, दिल्‍ली में पीर मौलाना बनकर घूमा, अब 14 दिन के पुलिस रिमांड पर

वैसे तो हर मुस्लिम को कुर्बानी करनी चाहिए, लेकिन ईद-उल-अजहा पर इसे लेकर कई नियम भी हैं. जिस शख्स या औरत के पास साढ़े सात तोला सोना या साढ़े बावन तोला चांदी या इतनी ही नकदी या फिर इसके बराबर संपत्ति है, तो उस पर कुर्बानी वाजिब है. यानी जो भी कुर्बानी के लिए जानवर खरीदने की ताकत रखता हो, उसे कुर्बानी करनी चाहिए.

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कब और किन जानवरों की होती है कुर्बानी

ईद-उल-अजहा (बकरीद) की नमाज के बाद ही कुर्बानी की जाती है. बकरीद के दिन को मिलाकर तीन दिन तक कुर्बानी का समय होता है. इसीलिए बकरीद तीन दिन का त्यौहार भी कह दिया जाता है. कुर्बानी के लिए भेड़, बकरी की उम्र कम से कम एक साल, भैंस की दो और ऊंट की उम्र 5 साल होनी चाहिए. सिर्फ उन्हीं जानवरों की कुर्बानी जायज है जिनके खुर होते हैं. पंजे वाले जानवरों या जो मांसाहारी होते हैं, उन्हें खाना और कुर्बानी हराम है.जिस जानवर की कुर्बानी करने जा रहे हैं वह पूरी तरह से स्वस्थ होना चाहिए.

गरीबों में बांटा जाता है कुर्बानी का गोश्त

कुर्बानी के बाद गोश्त के तीन हिस्से किए जाते हैं. एक हिस्सा अपने लिए, एक परिवार के लिए और गरीबों में बांटने के लिए. उन गरीबों को गोश्त को बांटा जाता है, ताकि जिनकी हैसियत कुर्बानी करने की नहीं है वह भी त्यौहार मना सकें.

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ज़िबह करने का हलाल तरीका

ज़िबह (कुर्बान) करने का तरीका होता है. आयतें और दुआ पढ़कर धीरे से ज़िबह किया जाता है. अचानक झटके से ज़िबह नहीं किया जाता. सही तरीके से ज़िबह करने से बकरे (या अन्य जानवर) में कीटाणुओं और अन्य ज़हरीले तत्वों का खतरा नहीं रहता है. इसलिए इसकी पूरी प्रकिया फॉलो की जाती है. विज्ञान भी इस तरीके पर मुहर लगा चुका है.

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