Basant Panchami 2020: बसंत पंचमी (Basant Panchami) के दिन मां सरस्‍वती प्रकट हुई थीं. इन्‍हें ही विद्या की देवी कहा जाता है. बसंत पंचमी को मां सरस्‍वती का पूजन करने से जीवन में सफलता प्राप्‍त होती है. Also Read - Basant Panchami 2020: बसंत पंचमी के 10 विशेष प्रयोग, इनसे मिलता है विद्या-वाणी का वरदान

बसंत पंचमी पर लोग मां सरस्‍वती की पूजा करते हैं. पीली वस्‍तुओं का प्रयोग करने की पंरपरा है. पर क्‍या आप जानते हैं कि इस दिन कुछ काम करने की मनाही होती है. Also Read - Basant Panchami 2020: जानें क्‍यों 30 जनवरी को मनाई जाएगी बसंत पंचमी, क्‍या है पांचांग भेद, अमलकीर्ति योग

बसंत पंचमी पर ना करें ये काम

– हिंदू धर्म में काले रंग को शुभ नहीं माना जाता. किसी भी पर्व-त्‍योहार पर इसे पहनकर पूजा नहीं होती. बसंत पंचमी तो जीवन का उत्‍सव है. ऐसे में इस दिन काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए. काले रंग का किसी भी तरह के प्रयोग से बचना चाहिए. Also Read - Happy Basant Panchami 2020: बसंत पंचमी पर भेजें Whatsapp Messages, Greetings, Photos, Images

Basant Panchami 2020: बसंत पंचमी पर कैसे हुई थी मां सरस्‍वती की उत्‍पत्ति, क्‍यों होती है कामदेव पूजा

– बसंत पंचमी के दिन मां सरस्‍वती का पूजन किया जाता है. ये दिन पूजा-पाठ और शुभता का होता है. इसलिए इस दिन तामसिक चीजों से दूर रहना चाहिए. इसमें नॉन-वेज, मदिरा आदि का सेवन शामिल है.

– बसंत पंचमी का दिन हरियाली का दिन होता है. इस दिन पेड़-पौधे लगाने चाहिए. पेड़-पौधों को काटना नहीं चाहिए.

– बसंत पंचमी, विद्या की देवी का दिन होता है. इस दिन मन को शांत रखना चाहिए. किसी भी तरह के वाद-विवाद से बचना चाहिए. घर में भी शांति का माहौल हो, कलह नहीं होनी चाहिए.

– बसंत पंचमी के दिन सुबह उठकर सबसे पहले स्‍नान करना चाहिए. इसके बाद ही कुछ खाना चाहिए. अगर पवित्र नदी में आप स्‍नान नहीं कर सकते, तो नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर नहाएं.

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मां सरस्‍वती

हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की. उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए. लेकिन उन्हें लगा कि रचना में कुछ कमी रह गई. तब ब्रह्मा जी ने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई.

उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था. ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा. जैसे वीणा बजी, ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज में स्वर आ गया. तब ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया. वह दिन बसंत पंचमी का था.

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