Basant Panchami 2020: बसंत पंचमी (Basant Panchami) के दिन मां सरस्‍वती का पूजन किया जाता है. ऐसा कहा जाता है कि इसी दिन सरस्‍वती मां सरस्‍वती की उत्‍पत्ति हुई थी.

मां सरस्‍वती की उत्‍पत्ति

बसंत पंचमी पर मां सरस्वती (Saraswati) की पूजा की जाती है. इसे श्री पंचमी (Shri Panchami) या सरस्वती पंचमी (Saraswati Panchami) भी कहा जाता है. ऐसा इसलिए है क्‍योंकि इसी दिन मां सरस्‍वती अस्तित्‍व में आई थीं.

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हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की. उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए. लेकिन उन्हें लगा कि रचना में कुछ कमी रह गई.

तब ब्रह्मा जी ने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई. उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था.

ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा. जैसे वीणा बजी, ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज में स्वर आ गया. तब ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया. वह दिन बसंत पंचमी का था.
तब से हर साल बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा. इस दिन देवी सरस्‍वती की पूजा की जाने लगी.

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कामदेव की पूजा

कुछ लोग बसंत पंचमी के दिन कामदेव को भी पूजते हैं. पौराणिक मान्यता के अनुसार, बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. बसंत को, ऋतुओं में सबसे सुहावना मौसम बताया गया है. मान्यता है कि कामदेव ही इस मौसम को रूमानी करते हैं.

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