Bhagoria Mela 2019: हिन्‍दी फिल्‍मों में मेला देखने गए नायक-नायिका के मिलन और बिछड़ने की कहानियां तो आपने बहुत देखी होगी लेकिन भारत में एक ऐसा भी मेला लगता है जो कुंआरों के मन की मुराद पूरी करता है. इसके लिए कुंवारे सज-धजकर मेले में जाते है और अपनी पसंद की लड़की को भगाकर शादी कर लेते हैं.

दरअसल मध्‍यप्रदेश, इंदौर के आदिवासी आदिवासी इलाकों धार, झाबुआ और खरगोन में भगोरिया मेला बेहद धूमधाम से मनाया जाता है. भगोरिया हाट-बाजारों में युवक-युवतियां सजधज कर जीवनसाथी को ढूढंने आते हैं. इनमें आपसी रजामंदी जाहिर करने का तरीका भी बेहद निराला होता है. सबसे पहले लड़का लड़की को पान खाने के लिए देता है अगर लड़की पान खा ले तो हां समझी जाती है. इसके बाद लड़का-लड़की को लेकर भगोरिया हाट से भाग जाता है और दोनों विवाह कर लेते हैं. दूसरा तरीका है, अगर लड़का-लड़की के गाल पर गुलाबी रंग लगा दे और जवाब में लड़की भी लड़के के गाल पर गुलाबी रंग लगा दे तो भी रिश्‍ता तय माना जाता है.

भगोरिया मेला एक नजर में
1. मध्‍यप्रदेश के झाबुआ, धार व पश्चिमी निमाड़ में होली के अवसर पर भगोरया मेला का आयोजन
होता है.
2. यह मेला भील व भिलाला आदिवासियों का है.
3. दरअसल इस मेला में आदि‍वासी पुरुष-महि‍लाएं अपना जीवन साथी चुनते हैं.

Phalguna 2019: हिंदू पंचांग का आखिरी मास फाल्‍गुन शुरू, करें ये काम, सबको मिलेगी Good News

4. आदिवासी लड़कि‍यां सज-धजकर आती हैं. आदि‍वासी लड़के जिस लड़की को पंसद करते हैं उसके चेहर पर गुलाल लगाता है. यदि लड़की को भी वह लड़का पंसद होता है तो वह उस लड़के के चेहरे पर वापस गुलाल लगाती है. इस तरह से जीवनसाथी का चुनाव किया जाता है.
5. जब इनके परिवार इन्‍हें गुम पाते हैं तो वे जाति नामक पंचायत में शिकायत करते हैं और अंत में पंचायत ही इस संबंध में मुहर लगाती है और लड़की का मूल्‍य तय करता है.
6. लड़के जो मूल्‍य लड़कियों के बदले चुकाते हैं उसे बापा कहा जाता है.

कब से शुरू होगा भगोरिया मेला
14 मार्च से उल्लास और मस्ती के प्रतीक भगोरिया मेलों की शुरुआत हो रही है. 20 मार्च को होलिका दहन तक सात दिन जिले में निर्धारित जगहों पर भगोरिया मेलों में उल्लास छाएगा. आदिवासी अपने प्रिय त्योहार की तैयारियों में जुटे गए हैं.

धर्म की और खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.