Bhishma Ashtami 2026: कब और क्यों मनाई जाती है भीष्म अष्टमी? जानिए तारीख और इसके पीछे छिपी पौराणिक कहानी

Bhishma Ashtami 2026: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भीष्म अष्टमी के दिन पितरों का तर्पण करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और वह प्रसन्न होकर अपना आशीर्वाद बरसाते हैं.

Published date india.com Published: January 19, 2026 5:12 PM IST
Bhishma Ashtami 2026: कब और क्यों मनाई जाती है भीष्म अष्टमी? जानिए तारीख और इसके पीछे छिपी पौराणिक कहानी

Bhishma Ashtami 2026: प्रत्येक वर्ष माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन भीष्म अष्टमी मनाई जाती है और इसका संबंध महाभारत के पितामह भीष्म से है. कई जगहों पर भीष्म अष्टमी को एकोदिष्ट श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है और इसे ​पितरों का तर्पण करने के लिए बहुत ही शुभ दिन माना गया है. कहते हैं कि भीष्म अष्टमी के दिन यदि पितरों का तर्पण किया जाए तो उनकी आत्मा को शांति मिलती है और पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है. आइए जानते हैं कब है भीष्म अष्टमी?

भीष्म अष्टमी 2026 कब है?

वैदिक पंचांग के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 25 जनवरी को रात 11 बजकर 10 मिनट पर शुरू होगी और 26 जनवरी को रात 9 बजकर 11 मिनट पर समाप्त होगी. उदयातिथि के अनुसार इस साल भीष्म अष्टमी का व्रत 26 जनवरी 2026 को रखा जाएगा. इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 29 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 38 मिनट तक रहेगा.

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क्यों मनाते हैं भीष्म अष्टमी?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ​भीष्म अष्टमी को पितामह भीष्म की पुण्यतिथि के ​रूप में मनाया जाता है. पितामह भीष्म को अपने पिता शांतनु से इच्छा मृत्यु का वरदान मिला था, यानि वह अपनी मर्जी के अनुसार अपने प्राण त्याग सकते थे. महाभारत युद्ध के अंतिम दिनों में पितामह भीष्म बाणों की शैय्या पर लेट गए और वहीं से युद्ध का अंत देखा. भीष्म पितामह ने बाणों की शैय्या पर लेटकर सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा की और माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन अपने प्राण त्याग दिए. तभी से इस पावन तिथि को उनकी पुण्यतिथि के रूप में मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितामह भीष्म ने यह तिथि इसलिए चुनी क्योंकि इस दौरान सूर्य उत्तर दिशा में होते हैं और सूर्य के उत्तरायण होने पर यदि देह त्यागी जाए तो मोक्ष की प्राप्ति होती है.

भीष्म अष्टमी के दिन व्रत रखने की परंपरा है और इस दिन यदि पितरों का तर्पण किया जाए तो पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है. साथ ही योग्य संतान की प्राप्ति का भी आशीर्वाद मिलता है. इस दिन पितरों का श्राद्ध कर्म करने के साथ ही उनके नाम से दान अवश्य करना चाहिए. ऐसा करने से पितरों की मोक्ष की प्राप्ति होती है.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.

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