
Renu Yadav
रेनू यादव, India.Com हिंदी में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के पद कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में करीब 15 वर्षों के अनुभव के दौरान उन्हें टेक्नोलॉजी, धर्म, लाइफस्टाइल, हेल्थ व अन्य विषयों ... और पढ़ें
Shiv Mandir: भगवान शिव के परम व अनन्य भक्तों में नंदी महाराज का नाम सबसे पहले आता है और नंदी पर शिवजी की भी विशेष कृपा रहती है. इसलिए उन्हें भगवान शिव के मंदिर में स्थान मिला हुआ है. प्रत्येक मंदिर में यहां भगवान शिव विराजमान हैं वहां उनकी सेवा के लिए नंदी महाराज भी विराजमान होते हैं. नंदी महाराज का मुख हमेशा शिवलिंग के सामने होता है. लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि महाराष्ट्र में एक बेहद ही अद्भुत मंदिर है जहां नंदी महाराज भगवान शिव से मुंह मोड़कर बैठे हुए हैं.
भुलेश्वर महादेव मंदिर में एक बेहद ही अनोखा नजारा देखने को मिलता है क्योंकि यह देश का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां नंदी भगवान शिव से मुंह मोड़कर बैठे हुए हैं. भुलेश्वर मंदिर महाराष्ट्र के पुणे-सोलापुर राजमार्ग से 10 किलोमीटर की दूरी पर पहाड़ियों के पास स्थित है. इस मंदिर का निर्माण 8वीं शताब्दी में हुआ था. इसकी दीवारों पर शास्त्रीय नक्काशी है और इसे संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है. ये मंदिर अपने बारे में प्रचलित लोककथा के लिए भी जाना जाता है. कहते हैं कि जब भी शिवलिंग पर मिठाई या पेड़े का भोग लगाया जाता है तो एक या एक से अधिक मिठाइयां गायब हो जाती हैं.
दरअसल, शिवलिंग के ठीक नीचे एक गुफा है, जहां पुजारियों द्वारा रोजाना प्रसाद चढ़ाया जाता है और प्रसाद का कुछ हिस्सा गायब हो जाता है. किसी को नहीं पता कि प्रसाद का हिस्सा कहां जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान स्वंय आकर प्रसाद को भोग लगाते हैं. मंदिर की एक खासियत ये भी कि मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव, गणेश और कार्तिकेय की स्त्री वेश वाली प्रतिमाएं मौजूद हैं. भक्त शिवलिंग के अलावा, स्त्री वेश धारण किए भगवान शिव, गणेश और कार्तिकेय का आशीर्वाद लेने आते हैं.
प्रत्येक मंदिर में शिवलिंग के सामने नंदी का मुख होता है, लेकिन भुलेश्वर महादेव का नजारा बिल्कुल अलग है. इस मंदिर में नंदी महाराज शिव जी से मुख मोड़कर बैठे हुए हैं. नंदी की गर्दन भगवान शिव को न देखते हुए दाईं साइड मुड़ी हुई है. प्रचलित कथा के अनुसार जब मां पार्वती भगवान शिव को वापस लेने के लिए आईं थीं, तब नंदी ने दोनों दंपत्ति को न देखते हुए चेहरा मोड़ लिया था. तब से लेकर अब तक नंदी इसी अवस्था में विराजमान है.
एक अन्य कथा के अनुसार, एक बार मां पार्वती से क्रोधित होकर भगवान शिव ने कैलाश छोड़ इसी स्थान पर सालों तक तपस्या की थी. भगवान शिव को मनाने के लिए मां पार्वती ने बेहद सुंदर रूप धारण किया और अपने नृत्य से भगवान शिव को प्रसन्न करने की कोशिश की. मां पार्वती का इतना मोहित रूप देखकर भगवान शिव अपना सारा गुस्सा भूल गए थे और वापस मां के साथ कैलाश प्रस्थान किया था. इसीलिए इस मंदिर का नाम भुलेश्वर महादेव पड़ा.
1000 साल पुराने इस मंदिर का बनाव और वास्तुकला बहुत अलग है, जिसमें मुगलकाल से लेकर मराठा सभ्यता की झलक देखने को मिलती है. भुलेश्वर मंदिर को कई बार तोड़ा गया और कई बार इसका फिर से निर्माण किया गया. यह मंदिर बाहर से दिखने में बिल्कुल ताजमहल की तरह नजर आता है, जबकि भीतर से बहुत प्राचीन है.
इनपुट: आईएएनएस
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