chaiti chhath 2019 का पर्व आरंभ हो चुका है. इस पर्व को बिहार में काफी धूमधाम से मनाया जाता है.

चैती छठ की शुरुआत मंगलवार को ‘नहाय-खाय’ के साथ हुई है. चार दिवसीय लोक आस्था और सूर्य उपासना का ये महापर्व, पारण के साथ समाप्‍त होगा.

चैती छठ पूजा में हालांकि कार्तिक महीने में होने वाले छठ महापर्व की तरह नदियों और जलाशयों में छठ व्रतियों की भारी भीड़ नहीं उमड़ती है. पर इसे भी काफी श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है.

क्‍या होता है नजर लगना? कैसे बचें बुरी ‘नजर’ से, जानें हर सवाल का जवाब…

चैती छठ को लेकर विभिन्न क्षेत्रों में छठ के गीत गूंजते हैं. व्रतियों द्वारा गाए जा रहे छठ गीतों से इस समय पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है.

परिवार की समृद्धि और कष्टों के निराकरण के लिए इस महापर्व के दूसरे दिन बुधवार को व्रती दिनभर बिना जल ग्रहण किए उपवास रखेंगे. इसके बाद सूर्यास्त होने पर ‘खरना’ करेंगे. इसमें भगवान भास्कर की पूजा करेंगे और उसके बाद दूध और गुड़ से खीर का प्रसाद बनाकर उसे ग्रहण करेंगे. इसके बाद करीब 36 घंटे का निराहार व्रत शुरू हो जाएगा.

पर्व के तीसरे दिन छठव्रती शाम को नदी, तालाबों सहित विभिन्न जलाशयों में पहुंचकर अस्ताचलगामी सूर्य को अघ्र्य अर्पित करेंगे. पर्व के चौथे और अंतिम दिन उदीयमान सूर्य के अर्घ्‍य देने के बाद व्रतधारियों का व्रत समाप्त हो जाएगा। इसके बाद व्रतधारी फिर अन्न-जल ग्रहण कर ‘पारण’ करेंगे.
(एजेंसी से इनपुट)

धर्म की और खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.