Champa shashti: हिन्दू कैलेंडर के अनुसार मार्गशीर्ष यानी अगहन मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को चंपा षष्ठी या बैंगन छठ के रूप में मनाया जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से सभी मनोकामना पूर्ण होती है. साथ ही इस दिन शिवलिंग पर जल अपर्ण के बाद बैंगन और बाजरा भी चढ़ाया जाता है. इसके कारण ही इस दिन को बैंगन छठ के रूप में मनाया जाता है. इस बार यह व्रत दो दिसंबर दिन सोमवार को है.

चंपा षष्ठी या बैंगन छठ का महत्व
चंपा षष्ठी के दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है. इसके साथ ही पूजा करते समय शिवलिंग पर बैंगन और बाजरा चढ़ाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव की पूजा और व्रत करने से भक्तों के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है. कहा जाता है कि जो सच्चे मन से भगवान भोलेनाथ का ध्यान कर पूजा करता है कि उसके सभी बिगड़े काम बन जाते हैं और घर में खुशियां आती हैं.

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चंपा छठ की मान्यता
यह त्योहार भगवान शिव के अवतार खंडोबा या खंडेराव को समर्पित है. खंडोबा को किसानों, चरवाहों और शिकारियों आदि का मुख्य देवता माना जाता है. यह त्योहार कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों का प्रमुख त्यौहार है. मान्यता है कि चंपा षष्ठी व्रत करने से जीवन में खुशियां बनी रहती है. ऐसी मान्यता है कि यह व्रत करने से पिछले जन्म के सारे पाप धुल जाते हैं और आगे का जीवन सुखमय हो जाता है.

जानिए पूजा विधि

  • चंपा षष्ठी या बैंगन छठ के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करके शिव मंदिर में जाएं .
  • मंदिर में शिवलिंग पर दूध, फूल, बेल पत्र आदि चढ़ाएं.
  • भोलेनाथ का ध्यान कर शिव चालीसा का पाठ करें.
  • शाम के समय शिव मंदिर में तिल के तेल के 9 दीप जलाएं.
  • भोलेनाथ को बैंगन और बाजरा अर्पित करें और भोग लगाकर इन्हें गरीबों में बांट दें.
  • ॐ श्रीं अर्धनारीश्वराय प्रेमतत्त्वमूर्तये नमः शिवाय. इस मंत्र का 108 बार जाप करें

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