नई दिल्ली: हिंदू धर्म में पूर्णिमा का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है. प्रत्येक वर्ष 12 पूर्णिमाएं होती हैं. जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 13 हो जाती है. कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है. इस पुर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा की संज्ञा इसलिए दी गई है क्योंकि आज के दिन ही भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का अंत किया था और वे त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे. ऐसी मान्यता है कि इस दिन कृतिका में शिव शंकर के दर्शन करने से सात जन्म तक व्यक्ति ज्ञानी और धनवान होता है. इस दिन चन्द्र जब आकाश में उदित हो रहा हो उस समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा इन छ: कृतिकाओं का पूजन करने से शिव जी की प्रसन्नता प्राप्त होती है. Also Read - 2021 में चार ग्रहण होंगे, पूरी तरह से ढँक जाएंगे चांद और सूरज, जानें डेट और समय

इस दिन गंगा नदी में स्नान करने से भी पूरे वर्ष स्नान करने का फाल मिलता है. इस दिन देव दीपावली भी है. साथ ही इसी दिन साल 2020 का आखिरी चंद्रग्रहण भी लगने वाला है. इस बार कार्तिक पूर्णिमा दो तरह से बहुत महत्वपूर्ण है. कार्तिक पूर्णिमा पर एक तरफ जहां चंद्रग्रहण लग रहा है, वहीं दो शुभ संयोग इस पूर्णिमा को बन रहे हैं. Also Read - Dev Diwali 2020: इस दिन भगवान शिव ने किया था त्रिपुरासुर राक्षस का वध, जानें देव दिवाली की पौराणिक कथा

पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण का समय Also Read - Chandra Grahan November 2020: कार्तिक पूर्णिमा पर साल का आखिरी चंद्र ग्रहण, जानें समय, सूतक काल

29 नवंबर की दोपहर 12 बजकर 47 मिनट पर
30 नवंबर की दोपहर 2 बजकर 59 मिनट पर
ग्रहण प्रारंभ 30 नवंबर की दोपहर 1 बजकर 4 मिनट पर
ग्रहण मध्यकाल 30 नवंबर की दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर
ग्रहण समाप्त 30 नवंबर की शाम 5 बजकर 22 मिनट पर

इन दो नक्षत्रों में लगेगा ये चंद्रग्रहण

वृषभ राशि और रोहिणी नक्षत्र में यह उपछाया चंद्रग्रहण लगेगा. इसका असर वृषभ राशि के जातको पर पड़ेगा. साथ ही इस ग्रहण में न तो कोई सूतक लगेगा और न ही किसी प्रकार के शुद्धिकरण आदि की आवश्यकता होगी.