
Gaurav Barar
गौरव बरार (Gaurav Barar) एक अनुभवी पत्रकार और कंटेंट विशेषज्ञ हैं जिनके पास 10 साल से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में, इंडिया.कॉम में बतौर चीफ सब एडिटर अपनी सेवाएं ... और पढ़ें
Chandra Grahan 2025: साल का आखिरी चंद्र ग्रहण आज यानी 7 सितंबर को लग रहा है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह एक खगोलीय घटना है, लेकिन दुनियाभर की संस्कृतियों में इसे लेकर अलग-अलग मान्यताएं और धारणाएं जुड़ी हुई हैं. विशेष रूप से हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण को लेकर कई धार्मिक उपाय और आस्थाएं प्रचलित हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि चंद्र ग्रहण का उल्लेख इस्लाम धर्म में भी मिलता है? और इस्लाम इसे किस नजरिए से देखता है.
इस्लामिक मामलों के जानकार, स्कॉलर एडवोकेट मुफ्ती उसामा नदवी ने इस विषय पर अहम जानकारी साझा की है. उन्होंने आजतक को बताया कि इस्लाम धर्म में चंद्र ग्रहण को “चांद ग्रहण” कहा जाता है. यह कोई अशुभ संकेत या अपशकुन नहीं माना जाता, बल्कि इसे अल्लाह की एक निशानी के रूप में देखा जाता है. मोहम्मद साहब की हिदायतें इस बात को साफ करती हैं कि ग्रहण के दौरान मुस्लिम समाज को क्या करना चाहिए.
मुफ्ती उसामा बताते हैं कि इस्लाम से पहले अरब समाज में यह धारणा थी कि सूरज या चांद का ग्रहण किसी महान व्यक्ति की मृत्यु या जन्म से जुड़ा होता है. लेकिन पैगंबर मोहम्मद ने इस सोच को गलत बताया और लोगों को समझाया कि सूर्य और चंद्रमा दोनों अल्लाह की बनाई हुई निशानियां हैं. इन पर ग्रहण लगना एक प्राकृतिक घटना है, जिसका उद्देश्य अल्लाह की शक्ति और कुदरत की याद दिलाना है.
इस्लाम में ग्रहण के समय विशेष नमाज पढ़ने की परंपरा है. सूरज ग्रहण के समय ‘सलात-अल-कुसूफ’ और चंद्र ग्रहण के समय ‘सलात-अल-खुसूफ’ नाम की विशेष नमाज अदा की जाती है. यह नमाज आम नमाजों से कुछ अलग होती है. इसमें दो रकाअतें होती हैं और हर रकाअत में दो रुकू और दो सज्दे होते हैं. इस नमाज में लंबी तिलावत, लंबा रुकू और लंबा सजदा किया जाता है, ताकि इबादत करने वाला व्यक्ति अधिक समय तक अल्लाह के सामने झुका रहे.
ग्रहण के समय सिर्फ नमाज ही नहीं, बल्कि अल्लाह को याद करना, दुआ करना, तौबा और इस्तगफार करना (अल्लाह से माफी मांगना) और जरूरतमंदों की मदद के लिए सदका-खैरात देना भी इस्लामी शिक्षाओं का हिस्सा है. यह समय आत्ममंथन और आध्यात्मिक रूप से जागरूक होने का होता है.
मुफ्ती उसामा नदवी के अनुसार, ‘ग्रहण इस बात की सीख देता है कि ब्रह्मांड की सबसे ताकतवर चीजें भी अल्लाह के हुक्म से चलती हैं. यह इंसान को याद दिलाता है कि अल्लाह ही मालिक है और वही हर चीज पर काबू रखता है.’ इस्लाम धर्म में ग्रहण को डर या अंधविश्वास की नजर से नहीं देखा जाता, बल्कि इसे एक चेतावनी, आत्मावलोकन और अल्लाह की महानता का प्रतीक माना जाता है.
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