नई दिल्ली: अश्विनी माह की चतुर्दशी तिथि को चतुर्दशी श्राद्ध (chaturdashi shradh) के रूप में मनाया जाता है. चतुर्दशी श्राद्ध तिथि केवल उन मृतकों के श्राद्ध के लिये उपयुक्त है, जिनकी मृत्यु किन्हीं विशेष परिस्थितियों में हुई हो, जैसे किसी हथियार द्वारा मृत्यु, दुर्घटना में मृत्यु, आत्महत्या अथवा किसी अन्य द्वारा हत्या. इनके अतिरिक्त चतुर्दशी तिथि पर किसी अन्य का श्राद्ध नहीं किया जाता है, अपितु इनके अतिरिक्त चतुर्दशी पर होने वाले अन्य श्राद्ध अमावस्या तिथि पर किये जाते हैं. चतुर्दशी श्राद्ध को घट चतुर्दशी श्राद्ध, घायल चतुर्दशी श्राद्ध तथा चौदस श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है.

श्राद्ध अनुष्ठान (chaturdashi shradh Timing) समय
चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ – सितम्बर 15, 2020 को 11:00 पी एम बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त – सितम्बर 16, 2020 को 07:56 पी एम बजे

श्राद्ध अनुष्ठान की (Chaturdashi Shradh Vidhi) विधि
इस दिन हाथ में जौ,कुश,काला तिल और अक्षत और जल ले कर तर्पण दें. इसके बाद “ऊं अद्य श्रुतिस्मृतिपुराणोक्त सर्व सांसारिक सुख-समृद्धि प्राप्ति च वंश-वृद्धि हेतव देवऋषिमनुष्यपितृतर्पणम च अहं करिष्ये” मंत्र का जाप करें. इसके बाद पंचबलि कर्म करें और ब्राह्मण भोज कराएं.

चतुर्दशी पर स्वाभाविक मृत्यु वालों का नहीं करना चाहिए श्राद्ध

भीष्‍म पितामह ने युधिष्ठिर को चतुर्दशी श्राद्ध के बारे में बताया था. उन्होनें बताया था कि जिस मनुष्य की स्‍वाभाविक मृत्‍यु न हुई हो उनका ही केवल श्राद्ध पितृ पक्ष की चतुर्दशी पर ही करना चाहिए. स्वाभाविक मौत मरने वालों का श्राद्ध इस दिन भूल कर भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे श्राद्धकर्ता को कई तरह के संकट के साथ आर्थिक तंगी और संतान से जुड़े कष्ट का सामना करना पड़ता है.