Chhath Puja 2018: पूर्वांचल सहित देश के विभिन्न इलाकों में पूरे हर्षोल्लास से छठ मनाई जाती है. छठ पर्व चार दिनों का होता है और इसकी शुरुआत नहाय खाय से होती है. इस बार छठ पूजा की शुरुआत 11 नवंबर से हो रही है. 11 नवंबर को नहाय खाय है, 12 नवंबर को खरना है, 13 नवंबर को संध्‍या अर्घ्‍य है और 14 नवंबर को सुबह का अर्घ्‍य दिया जाएगा. Also Read - Chhath Puja 2020: छठ पूजा का समापन आज, इस तरह से दें सूर्य को अर्घ्य, ये है पारण का समय

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क्‍यों दिया जाता है डूबते सूर्य को अर्घ्‍य Also Read - Chhath Puja 2020 Recipe: आज के छठ पूजा का तीसरा दिन इस दिन घर पर बनाएं चावल लड्डू , जानें इसकी रेसिपी

आपने अक्‍सर सूर्य उपासकों को सुबह सुबह सूर्य को अर्घ्‍य देते हुए देखा होगा. लेकिन शाम में डूबते हुए सूर्य को जल चढ़ाते शायद ही किसी को देखा होगा. लेकिन छठ में सूर्य को शाम में भी अर्घ्‍य देते हैं. सूर्यषष्‍ठी के नाम से जाना जाने वाला यह पर्व दरअसल, सूर्य की अराधना का पर्व ही है.

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ऐसी मान्‍यता है कि उगते हुए सूर्य के साथ डूबते हुए सूर्य को अर्घ्‍य देना बेहद फलदायी साबित होता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि शाम के वक्त सूर्य को अर्घ्य इसलिए फायदेमंद होता है क्योंकि इस समय सूर्य की पत्नी उनके साथ होती है जिससे व्रत रखने वाली महिलाओं को इसका दोहरा लाभ होता है.

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वहीं ऐसा भी माना जाता है कि शाम के वक्त सूर्य को अर्घ्य देने से बिना किसी विवाद के मुकदमे में फसें लोगों को इसका काफी फायदा होता है और मुकदमों से छुटकारा मिलता है. इसके अलावा पाचन तंत्र से संबंधित समस्यों से भी छुटकारा मिलता है. इसी तरह वैज्ञानिक तर्क के मुताबिक इससे आंखों की चमक और रोशनी दोनों को लाभ होता है.

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