नई दिल्ली: छठ के बारे में याद करते ही हमारे जहन में सबसे पहले छठ मइया के गीत और सूरज की पूजा करती महिलाओं की तस्वीरें सबसे पहले आती हैं. प्रकृति आराधना का महापर्व छठ हर साल बेहद ही सौहार्दपूर्ण रूप से मनाया जाता है. इस बार छठ का महापर्व 31 अक्टूबर से शुरू हो रहा है. चार दिन तक चलने वाला ये पर्व 3 नवम्बर को समाप्त होगा. सूर्य षष्ठी यानी छठ पूजा की रौनक इन दिनों बाजार में देख सकते. नौकरी या व्‍यवसाय के सिलसिले में घर से दूर रहने वाले लोग छठ पर अपने घर आने का हर संभव प्रयास करते हैं. ये पर्व बिहार में सबसे ज्यादा प्रचलित है. लोक आस्था के महापर्व छठ में गंगा तट पर उमड़ने वाली भीड़ के मद्देनजर और व्रतियों को भागवान भास्कर के अघ्र्य देने की सुविधा के लिए प्रशासन छठ घाटों को तैयार करने में जुटा है. इस दौरान पटना के 22 घाटों को खतरनाक घोषित कर दिया गया है.

हम आपको छठ 2019 से जुड़ी हर जानकारी दे रहे हैं.

1. पहले दिन- नहाय-खाय (31 अक्टूबर)
छठ महापर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है. इस बार ये 31 अक्‍टूबर को है. मान्यता है कि इस दिन व्रती स्नान आदि कर नए वस्त्र धारण करते हैं. इसके अलावा लोग शाकाहारी भोजन गृहण करते हैं. जब वृत रखने वाला भोजन करता है उसके बाद ही परिवार के अन्य सदस्य भोजन करते हैं.

2. दूसरे दिन- खरना (1 नवम्बर)
खरना.. नहाय खाय के दूसरे दिन होता है, जो कार्तिक शुक्ल की पंचमी तिथि होती है. खरना इसलिए खास है क्‍योंकि इस दिन व्रतधारी दिनभर उपवास रखने के बाद शाम को भगवान को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करते हैं. प्रसाद में चावल, दूध के पकवान, ठेकुआ (घी, आटे से बना प्रसाद) बनाया जाता है. खरना के दिन अगर किसी भी तरह की आवाज हो तो व्रती खाना वहीं छोड़ देते हैं. इसलिए इस दिन लोग ये ध्‍यान रखते हैं कि व्रती के आसपास शोर-शराबा ना हो.

3. तीसरे दिन- डूबते सूर्य को अर्घ्‍य (2 नवम्बर)
छठ का पहला अर्घ्य षष्ठी तिथि को दिया जाता है. यह अर्घ्य अस्ताचलगामी सूर्य को दिया जाता है. इस समय जल में दूध डालकर सूर्य की अंतिम किरण को अर्घ्य दिया जाता है. इस दिन नदी, तालाब में खड़े होकर ढलते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है.

4. चौथे दिन- उषा अर्घ्य का दिन (3 नवम्बर)
छठ पर्व के अंतिम दिन सुबह के समय सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है. चौथे दिन कार्तिक शुक्ल सप्तमी की सुबह उदियमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. छठव्रती दोबारा वहीं जमा होते हैं जहां उन्होंने शाम को अर्घ्य दिया था और पिछले शाम की प्रक्रिया की पुनरावृत्ति होती है. अंत में व्रती कच्चे दूध का शरबत पीकर और थोड़ा प्रसाद खाकर व्रत पूर्ण करते हैं. विधिवत पूजा कर प्रसाद बांटा कर छठ पूजा संपन्न की जाती है.