यह पवित्र पर्व कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है. यह चार दिन का पर्व होता है. , छठ पूजा की शुरूआत हो चुकी है और ये सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है. छठ पर्व को मन्नतों का पर्व भी कहा जाता है, छठ की पूजा लोग अपने पति और बच्चों की लंबी औऱ स्वस्थ उम्र के लिए करते हैं. छठ पूजा का प्रारंभ चतुर्थी तिथि को नहाय खाय से होता है और सप्तमी के दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद समाप्त होता है. Also Read - Chhath Puja 2020: उदीयमान सूर्य को अर्घ्यदान के साथ ही संपन्न हुआ चार दिनों का महापर्व छठ, ऐसा दिखा नजारा

छठ पूजा का प्रारंभ चतुर्थी तिथि को नहाय खाय से होता है और सप्तमी के दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद समाप्त होता है. इस पूजा में सुहाग के प्रतीक सिंदूर का खास महत्व है. इसलिए पूजा के दौरान महिलाएं नाक से लेकर मांग तक लंबा सिंदूर लगाती हैं. आज हम आपको बताएंगे कि छठ पर्व पर महिलाएं लंबा सिंदूर मांग में क्यों लगाती हैं. Also Read - Chhath Puja 2020: छठ पूजा का समापन आज, इस तरह से दें सूर्य को अर्घ्य, ये है पारण का समय

सिंदूर का महत्व
छठ की पूजा अपने बच्चों को संतान प्राप्ति के लिए करते हैं, या फिर उनकी लंबी उम्र के लिए रखा जाता है. इसलिए इस पूजा में सुहाग के प्रतीक सिंदूर का खास महत्व होता है. इस दिन पूजा करने वाली महिलाएं अपने पति और बच्चों के लिए बड़ी निष्ठा और तपस्या से व्रत रखती हैं. वैसे भी हिंदू धर्म में विवाग के बाद मांग में सिंदूर भरने को सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. छठ पूजा में भी महिलाएं नाक से लेकर मांग तक लंबा सिंदूर लगाती हैं. मान्यता है कि मांग में लंबा सिंदूर भरने से पति की आयु लंबी होती है. Also Read - Chhath puja 2020: कोरोना पर आस्था भारी, छठव्रतियों ने कहा-छठी मैया होऊ ना सहाय...

ये भी है मान्यता
विवाहित महिलाओं को सिंदूर लंबा और ऐसा लगाना चाहिए जो सभी को दिखे. ये सिंदूर माथे से शुरू होकर जितनी लंबी मांग हो उतना भरा जाना चाहिए. मान्यता है कि जो भी महिलाएं पूरे नियमों के साथ छठ व्रत को करती हैं, छठी मइया उनके परिवार को सुख और समृद्धि से भर देती हैं.