
Renu Yadav
रेनू यादव, India.Com हिंदी में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के पद कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में करीब 15 वर्षों के अनुभव के दौरान उन्हें टेक्नोलॉजी, धर्म, लाइफस्टाइल, हेल्थ व अन्य विषयों ... और पढ़ें
Chhath Puja 2024: छठ महापर्व की शुरुआत 5 नवंबर को नहाय-खाय के साथ हो चुकी है और इस पर्व को देश के कई हिस्सों में बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है. विशेष तौर पर बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और झारखंड में मनाए जाने वाले छठ पर्व में छठी मैया और भगवान सूर्यदेव का पूजन होता है. आज छठ का दूसरा दिन है जिसे खरना कहते हैं और इसी के साथ 36 घंटे का निर्जला व्रता आरंभ होता है. आइए जानते हैं खरना का महत्व और इसके नियम.
छठ महापर्व के दूसरे दिन खरना किया जाता है और इसका विशेष महत्व माना गया है. इस दिन व्रत रखने वाले जातक मिट्टी के चूल्हे पर बने खास भोजन का ही सेवन करते हैं. मिट्टी का नया चूल्हा बनाकर उस पर चावल, दूध और गुड़ की खीर बनाई जाती है. सबसे पहले छठी मैया को इस खीर का भोग लगाया जाता है और फिर व्रती इसे प्रसाद के तौर पर ग्रहण करके निर्जला व्रत शुरू करते हैं. खरना के दिन छठी मैया की उपासना की जाती है.
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छठ पूजा के दौरान खरना के दिन भी सूर्य भगवान का पूजन किया जाता है और इसके अगले दिन भक्त सूर्योदय से पहले नदी, घाट या तालाब पर पहुंचते हैं और दिन भर पानी में खड़े रहते हैं. इसके बाद सूर्यादय के दौरान भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. फिर शाम को सूर्यास्त के समय भी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. इस व्रत में महिलाएं सूर्य देवता के डूबने के इंतजार में छठी मैया के गीत भी गाती हैं. छठ के पर्व की रौनक हर तरफ देखी जा सकती है. सूर्य डूबने पर व्रती पीतल के कलश में दूध और जल से सूर्य को अर्घ्य देते हैं और प्रसाद चढ़ाते हैं.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.
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