
Renu Yadav
रेनू यादव, India.Com हिंदी में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के पद कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में करीब 15 वर्षों के अनुभव के दौरान उन्हें टेक्नोलॉजी, धर्म, लाइफस्टाइल, हेल्थ व अन्य विषयों ... और पढ़ें
Chhath Puja 2024: हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि के दिन छठ पर्व मनाया जाता है जिसकी शुरुआत चतुर्थी तिथि से हो जाती है. पंचांग के अनुसार आज यानि 5 नवंबर से छठ पर्व शुरू हो गया है और पहले दिन नहाय-खाय किया जाता है. छठ पूजा में पवित्रता व परंपराओं का खास ध्यान रखा जाता है. विशेष तौर पर सुहागिन महिलाएं इस दौरान 16 श्रृंगार करती हैं लेकिन यह श्रृंगार सिंदूर के बिना अधूरा होता है. छठ पूजा में महिलाएं केवल मांग में ही नहीं, बल्कि बल्कि नाक से लेकर मांग तक सिंदूर लगाती हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर छठ पूजा में महिलाएं नाक से मांग तक सिंदूर क्यों लगाती हैं? आइए इस लेख के माध्यम से जानते हैं कि छठ पूजा में नाक तक सिंदूर लगाने का महत्व.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सिंदूर सुहागिन महिला की निशानी होता है और नाक से मांग तक सिंदूर भरने का मतलब पति की लंबी उम्र की कामना करना है. मान्यताओं के अनुसार महिलाएं जितना लंबा सिंदूर लगाती हैं पति की आयु भी उतनी ही लंबी होती है. महिलाएं सिंदूर को नाक से लेकर मांग तक भरती हैं.
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पौराणिक कथा के अनुसार जंगल में एक बस्ती थी, जहां पर वीरवान नाम का युवक रहता था. वीरवान शिकारी और वीर दोनों था. बड़े से बड़े नरभक्षी हो या शेर उसके एक वार से सब पस्त हो जाते थे. वहीं गांव के बाहर धीरमति नाम की युवती रहती थी. एक बार वन्य के पशुओं ने धीरमति को घेर लिया. तब वीरवान ने उसके प्राण बचाएं. वो दोनों एक दूसरे पर मोहित हो गए और साथ रहने लगे. उस समय विवाह जैसी परंपराओं का चलन नहीं था लेकिन उस जंगल में एक कालू रहता था, जिसे उन दोनों का मिलना पसंद नहीं था.
एक दिन वीरवान और धीरमती जंगल पर काफी अंदर चले गए. जब उन्हें कोई शिकार नहीं मिला तो दोनों को प्यास लगी. तब वीरवान जल की खोज में निकला. इधर धीरमति का इंतजार कर रही थी. कालू को अच्छा मौका मिल गया और उसने वीरवान को अकेले देखकर हमला कर दिया और उसे घायल कर दिया. उसकी गूंज सुनते ही धीरमति दौड़ी आई. धीरमति ने कालू पर हंसिया चला दी और कालू ने भी धीरमती पर चाकू फेंक कर.
अब धीरमती वीरवान के सीने से लिपट गई वीरवान ने अपनी पत्नी की बहादुरी की सराहना की और अपना हाथ प्यार से उसके सर पर रखे. हाथ खून में रंगा था इसलिए धीरमति की मांग और माथे पर खून लग गया. क्योंकि सिंदूर शौर्य का प्रतीक है. वहीं इज्जत नाक से जुड़ी है. ऐसे में सिंदूर को शौर्य, प्रेम, इज्जत और वीरता का प्रतीक मानते हैं. हालांकि छठ पर्व पर नाक तक सिंदूर लगाने के पीछे पति की लंबी आयु प्रतिष्ठा और सम्मान की कामना होती है.
एक अन्य कथा के अनुसार जब दुशासन गरजते हुए द्रौपदी के कक्ष में पहुंचा तब उन्होंने ऋतु स्नान नहीं किया था और उनकी मांग सिंदूर से नहीं भरी थी. ऐसे में दुशासन ने कहा कि तूने अभी तक यह भी तय नहीं किया कि किसके नाम का सिंदूर लगाना है और ऐसा कह कर उसने द्रौपदी के बाल पकड़े और खींचने लगा. द्रौपदी बिना सिंदूर लगाए पतियों के सामने नहीं जा सकती थी इसलिए उन्होंने जल्दी से सिंदूर दानी ही अपने सर पर पलट ली, जिससे गलती से सिंदूर नाक तक लग गया. इसलिए वस्त्र हरण के बाद द्रौपदी ने बाल खुले रखे और हमेशा नाक तक लंबा सिंदूर लगाया.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.
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