नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित चिंतामन गणेश मंदिर में अब महाकाल मंदिर की तरह ही चांदी के सिक्के बेचे जाएंगे. सोमवार को उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई प्रबंध समिति की बाठक में यह निर्णय लिया गया. वहीं, मंदिर के प्रबंधक अभिषेक शर्मा ने बताया कि मंदिर समिति 5 और 10 ग्राम के चांदी के सिक्कों को बेचेगी. चांदी के सिक्कों के डिजाइन की बात करें तो इसके एक और भगवान चिंतामन गणेश वहीं दूसरी ओर मंदिर की आकृति होगी. बता दें कि सिक्कों की कीमत अभी तक तय नहीं की गई है. सोमवार को हुई बैठक में लड्डू प्रसाद बेचे जाने पर भी निर्णय लिया गया है. चिंतामन गणेश मंदिर समिति महाकाल मंदिर से लड्डू प्रसाद खरीदकर भक्तों को बेचेगी. Also Read - मध्य प्रदेश: उज्जैन में जहरीली शराब से 11 लोगों की मौत, 5 पुलिसकर्मी निलंबित

चिंतामन गणेश भारत के मध्य प्रदेश के उज्जैन में भगवान गणेश का सबसे बड़ा मंदिर है. यह मंदिर फतेहाबाद रेलवे लाइन पर क्षिप्रा नदी के पार बनाया गया है, और उज्जैन शहर से लगभग 7 किमी दूर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है. चिंतामण गणेश मंदिर परमारकालीन है, जो कि 9वीं से 13वीं शताब्दी का माना जाता है. इस मंदिर के शिखर पर सिंह विराजमान है. वर्तमान मंदिर का जीर्णोद्धार अहिल्याबाई होलकर के शासनकाल में हुआ. Also Read - उज्जैन में बड़ा हादसा टला, बाल-बाल बचे BJP सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया- जानें पूरा मामला

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चिंतामण गणेश सीता द्वारा स्थापित षट् विनायकों में से एक हैं. जब भगवान श्रीराम ने सीता और लक्ष्मण के साथ अवंतिका खंड के महाकाल वन में प्रवेश किया था तब अपनी यात्रा की निर्विघ्नता के लिए षट् विनायकों की स्थापना की थी. ऐसी भी मान्यता है कि लंका से लौटते समय भगवान राम, सीता एवं लक्ष्मण यहां रुके थे. यहीं पास में एक बावड़ी भी है जिसे लक्ष्मण बावड़ी के नाम से जाना जाता है. बावड़ी करीब 80 फुट गहरी है. Also Read - राज्य सरकार ने वापस लिया फैसला, अब कल से महाकाल मंदिर के दर्शन कर सकेंगे मध्य प्रदेश से बाहर के श्रद्धालु