Christmas 2025: क्रिसमस के लिए लाल, हरा और सफेद रंग का ही क्यों होता है उपयोग? जानिए इसके पीछे छिपी वजह और महत्व

Christmas 2025: ईसाई समुदाय के लिए क्रिसमस का पर्व काफी महत्वपूर्ण होता है और इस पर्व को दुनियाभर में बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है. इस दौरान क्रिसमस की डेकोरेशन मुख्य आकर्षण होती है.

Published date india.com Published: December 16, 2025 10:33 AM IST
Christmas 2025: क्रिसमस के लिए लाल, हरा और सफेद रंग का ही क्यों होता है उपयोग? जानिए इसके पीछे छिपी वजह और महत्व

Christmas 2025: हर साल 25 दिसंबर के दिन ​क्रिसमस का पर्व मनाया जाता है जो कि केवल ईसाई समुदाय के लोग ही नहीं, बल्कि अन्य धर्म के लोग भी बहुत धूमधाम से मनाते हैं. क्रिसमस पर साज-सजावट और तोहफे देना एक खास परंपरा होती है और इस दौरान हर जगह रंग-बिरंगी लाइट, क्रिसमस ट्री, कलरफुल जुराब जैसी चीजों की रौनक अलग ही दिखती है. क्रिसमस की सजावट में मुख्य रूप से लाल, हरा और सफेद रंग का उपयोेग किया जाता है, जिन्हें क्रिसमस के लिए पारंपरिक रंग माना गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर क्रिसमस के मौके पर इन पारंपरिक रंगों का क्या महत्व है?

हरा रंग: क्रिसमस की डेकोरेशन में हरे रंग का खास महत्व माना गया है और इसका पारंपरिक महत्व सदाबहार पौधों से जुड़ा होता है. सदाबहार पौधे कभी मुरझाते नहीं और हमेशा हरे रंग के ही रहते हैं. मान्यताओं के अनुसार कई वर्ष पहले क्रिसमस के दौरान रोमन लोग सौभाग्य के प्रतीक के रूप में एक-दूसरे को सदाबहार पौधे दिया करते थे. क्रिसमस के दौरान कड़ाके की ठंड में सभी पौधे सूख जाते हैं तब सदाबहार पौधों की हरियाली अलग ही नजर आती है. इसलिए ईसाई समुदाय में हरा रंग अनंत जीवन का प्रतीक माना गया है. इस रंग का अर्थ है कि ईश्वरीय कृपा बनी हुई है.

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लाल रंग: जब भी क्रिसमस की तैयारियां या साज-सजावट होती है तो हर जगह लाल रंग नजर आता है. इस लाल रंग के पीछे भी कुछ पारंपरिक कारण छिपे हुए हैं. कहते हैं कि मध्य युग में यूरोप के कई हिस्सों में क्रिसमस से एक दिन पहले स्वर्ग की कथाओं पर आधारित नाटक हुआ करते हैं जिसके जरिए उन लोगों को बाइबिल की कहानियां सुनाई जाती थी जो कि पढ़ नहीं सकते. इन कथाओं व नाटकों में स्वर्ग का वृक्ष या चीड़ का पेड़ होता था जिस पर सेब बंधे होते थे. इसलिए क्रिसमस की सजावट में सेब व लाल रंग के फलों का उपयोग किया जाता था. धीरे-धीरे क्रिसमस के दौरान इस रंग की लोकप्रियता बढ़ती गई और अब सिर्फ डेकोरेशन ही नहीं, बल्कि इस दिन लाल रंग की ड्रेस की भी अलग ही क्रेज होता है.

सफेद रंग: प​श्चिमी देशों की बात करें यहां की संस्कृति में सफेद रंग को पवित्रता व शांति का प्रतीक माना गया है. यहां सर्दियों के मौसम चारों ओर बर्फ की चादर ढकी होती है. कहते हैं कि 18वीं शताब्दी में पेड़ों को सजाने के लिए सफेद वेफर्स का इस्तेमाल किया जाता था और सफेद वेफर्स व लाल रंग के सेब को ईसा मसीह के शरीर व रक्त के कैथोलीक प्रतीक माना जाता था. ईसाई समुदाय के लोग क्रिसमस के मौके पर अपने घरों को सफेद रंग से सजाते हैं जिसे प्रभु यीशु के जन्म का स्वागत माना जाता था. इसलिए क्रिसमस के मौके पर चर्चों में आज भी सफेद रंग का उपयोग किया जाता है.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.

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