नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में स्थित महाकालेश्वर मंदिर ( Ujjain Mahakal Temple) भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में शामिल है. महाकालेश्वर पूरे देश भर में बहुत प्रसिद्ध है. श्री महाकालेश्वर का मंदिर भारत के प्रमुख देवस्थानों में विशेष स्थान रखता है. भगवान महाकाल काल के भी अधिष्ठाता देव माने जाते हैं. हाल ही में उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुई 8 पुलिसकर्मियों की मौक के बाद फरार हुआ दोषी विकास दुबे (Vikas Dubey) को पुलिस ने महाकाल मंदिर से गिरफ्तार किया. आज यानी गुरुवार को मध्यप्रदेश के उज्जैन के महाकाल मंदिर से विकास की गिरफ्तारी हुई है. बताया जा रहा है कि उसने महाकालेश्वर मंदिर की पर्ची कटाई और बाद में उसने खुद ही सरेंडर कर दिया. Also Read - मध्य प्रदेश: उज्जैन में जहरीली शराब से 11 लोगों की मौत, 5 पुलिसकर्मी निलंबित

महाकालेश्वर मंदिर से जुड़ी हैं लोगों की आस्था Also Read - दो महीने पहले एनकाउंटर में मारे गए विकास दुबे के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा, जानें मामला

मध्य प्रदेश का उज्जैन शहर अपने पौराणिक और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है. इसके आकाश में तारक लिंग, पाताल में हाटकेश्वर लिंग और पृथ्वी पर महाकालेश्वर ही मान्य शिवलिंग है. जहां पर लोग अकाल मौत पर विजय पाने की आस्था के साथ पहुंचते हैं. Also Read - गैंगस्‍टर विकास दुबे 'कानपुरवाला' के नाम पर बदमाश लोगों के बीच पैदा कर रहे दहशत

उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर का इतिहास (Ujjain Mahakal Temple History)

इतिहास से पता चलता है कि उज्जैन में सन् 1107 से 1726 ई. तक यवनों का शासन था. इनके शासनकाल में अवंति की लगभग ४५०० वर्षों में स्थापित हिन्दुओं की प्राचीन धार्मिक परंपराएं प्राय: नष्ट हो चुकी थी. लेकिन 1790 ई. में मराठों ने मालवा क्षेत्र में आक्रमण कर दिया और 29 नवंबर 1827 को मराठा शासकों ने मालवा क्षेत्र में अपना अधिपत्य स्थापित कर लिया. इसके बाद उज्जैन का खोया हुआ गौरव पुनः लौटा और सन 1831 से 1809 तक यह नगरी मालवा की राजधानी बनी रही. मराठों के शासनकाल में यहाँ दो महत्त्वपूर्ण घटनाएँ घटीं – पहला, महाकालेश्वर मंदिर का पुनिर्नर्माण और ज्योतिर्लिंग की पुनर्प्रतिष्ठा तथा सिंहस्थ पर्व स्नान की स्थापना, जो एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी. आगे चलकर राजा भोज ने इस मंदिर का विस्तार कराया.

यहां भक्तों को प्राप्त होता है मोक्ष

महाकाल के केवल दर्शन से ही मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है. भव्य, दक्षिणमुखी और स्वयंभू होने की वजह से महाकालेश्वर महादेव की बेहद पुण्यदायी महत्ता है. महाकालेश्वर मंदिर का पुराणों, महाभारत और कालिदास जैसे महाकवियों की रचनाओं में सुंदर वर्णन किया गया है.