नई दिल्ली: भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव पर कृष्ण जन्माष्टमी  (Krishna Janmashtami 2020) का पर्व मनाया जाता है. भगवान कृष्ण के श्रद्धालु जन्म अष्टमी को पूरी श्रद्धा और उत्साह से मनाते हैं. कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर दही-हांडी की परंपरा होती है. जन्म अष्टमी पर दही हांडी महाराष्ट्र और गुजरात में उत्सव का प्रतीक है. मिट्टी के बर्तन को दही, मक्खन के साथ ऊंचाई पर लटका दिया जाता है. फिर युवाओं का झुंड मानव चेन बनाकर हांडी को तोड़ता है. इस साल कोरोना महामारी के चलते देश में दही -हांड़ी का उत्सव नहीं मनाया जाएगा.Also Read - Dhaniya Panjiri Health Benefits: जन्माष्टमी पर बनने वाली धनिया पंजीरी खाने से सेहत को मिलते हैं कई फायदे, आप भी जानें

क्या है दही-हांडी (Dahi Handi 2020) के पीछे मान्यता Also Read - krishna janmashtami 2020: भगवान कृष्ण की पूजा करते समय ध्यान रखें ये बातें, ना करें ये गलतियां

दही -हांडी का उत्सव मनाने के पीछे मान्यता है कि भगवान कृष्ण को माखन काफी प्रिय था. बालपन में वह पड़ोसियों के घरों से मक्खन चुराया करते थे. इसके चलते उनका नाम ‘माखन चोर’ भी पड़ गया. भगवान कृष्ण सभी के घर से माखन चुराते थे जिससे उनकी मां यशोदा उनसे काफी परेशान हो गईं थी. इसके लिए मां यशोदा ने सभी पड़ोसियों से अपनी माखन की हांडी को ऊंचाई पर बांधने की सलाह दी थी. मगर फिर भी भगवान कृष्ण अपने दोस्तों के साथ मानव चेन बनाकर हांडी तक पहुंच जाते और हांडी तोड़कर आपस में बांट लेते. इसी के चलते जन्माष्टमी के दिन कई जगहों पर दही-हांडी का उत्सव मनाया जाता है. Also Read - Krishna Janmashtami 2020: जानें क्यों जन्माष्टमी के दिन भवगान कृष्ण को लगाते हैं 56 भोग, पढ़ें इससे जुड़ी कथा

दही हांडी (Dahi Handi 2020 Subh Muhurat) शुभ मुहूर्त

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का प्रारंभ 11 अगस्त को सुबह 09 बजकर ​06 मिनट से हो गया है, जो 12 अगस्त को दिन में 11 बजकर 16 मिनट तक रहेगा. ऐसे में दही हांडी का खेल अष्टमी के अगले दिन आयोजित होता है, तो इस वर्ष दही हांडी का उत्सव 12 अगस्त यानी मनाया जाएगा.