Darsh Amavasya 2018: दर्श अमावस्या या दर्शा अमावस्या या आषाढ़ अमावस्या के दिन चन्द्रमा दिखाई नहीं देता. इस रात चांद गायब रहता है. आषाढ़ मास की अमावस्या को दर्शा अमावस्या कहा जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन किए उपायों और पूजा से घर में सुख समृद्धि आती है और उद्धार होता है. इस दिन पूर्वजों की भी पूजा होती है. हिंदू धर्म में इसका खास महत्व है. ‘नो मून डे’ के बाद यह पहला दिन होता है, यही वजह है कि चन्द्र दर्शन दिवस पर नए चंद्रमा को देखने के बाद लोग इस दिन व्रत जरूर रखते हैं. ऐसी मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से चंद्रमा की पूजा करने वाले लोगों की हर मनोकामना पूर्ण होती है. इस बार 13 जुलाई 2018 को आषाढ़ अमावस्या होगा.

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महत्व:
दर्श अमावस्या के खास दिन का व्रत रखने और चंद्रमा की पूजा करने से चंद्र देवता अपनी कृपा बदसातेे हैं और सौभाग्य व समृद्धि का आर्शीवाद देते हैं. चंद्र देव भावनाओं और दिव्य अनुग्रह के स्वामी हैं. इसे श्राद्ध की अमावस्या भी कहते हैं. क्योंकि इस दिन अपने पूर्वजों को याद किया जाता है और उनके लिए प्रार्थना की जाती है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन पूर्वज धरती पर आकर अपने परिवार को आर्शीवाद देते हैं.

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जीवन में अगर आपके बहुत संघर्ष चल रहा है और बहुत कोशिशों के बावजूद सफलता हाथ नहीं लग रही है तो दर्श अमावस्या का व्रत रखने व चंद्र पूजन से जीवन में सफलता और अच्छा भाग्य प्राप्त होता है.

पूर्वजों की पूजा
दर्श अमावस्या को श्राद्ध अमावस्या भी कहते हैं. इस दिन पूर्वजों की पूजा भी अवश्य करनी चाहिए. क्योंकि यह दर्श अमावस्या का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. मोक्ष प्राप्ति के लिए इस दिन खास पूजा की जाती है.

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व्रत एवं पूजन विधि
पुराणों के अनुसार अमावस्या के दिन स्नान-दान करने की परंपरा है. वैसे तो इस दिन गंगा-स्नान का विशिष्ट महत्व माना गया है, परंतु जो लोग गंगा स्नान करने नहीं जा पाते, वे किसी भी नदी या सरोवर तट आदि में स्नान कर सकते हैं तथा शिव-पार्वती और तुलसीजी की पूजा करते हैं.

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इस दिन हनुमान जी की पूजा का भी खास महत्व है. इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से जीवन से रोग दोष दूर हो जाते हैं. दर्श अमावस्या के दिन यदि जातक 100 बार श्री हनुमान चालीसा का पाठ करता है तो जीवन में संकटों से मुक्ति मिल जाती है.

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