नई दिल्ली: हिंदू शास्त्रों के मुताबि‍क दर्श अमावस्या (Darsh Amavasya 2020) पर चांद पूरी रात गायब रहता है. कहते हैं कि सुख समृद्धि व परिवार के उद्धार की कामना के लिए यह दिन बहुत खास होता है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन किए उपायों और पूजा से घर में सुख समृद्धि आती है और उद्धार होता है. इस दिन पूर्वजों की भी पूजा होती है. हिंदू धर्म में इसका खास महत्व है. इस साल दर्श अमावस्या 20 जुलाई 2020 यानी रविवार को मनाई जाएगी. Also Read - Darsh Amavasya 2020 : आज दर्श अमावस्या, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

दर्श अमावस्या (Darsh Amavasya 2020 subh muhurat) समय Also Read - December 2018 Vrat and Tyohar: साल के आखिरी महीने में आने वाले हैं ये व्रत और त्योहार, देखें पूरी लिस्ट

श्रावण, कृष्ण अमावस्या
प्रारम्भ –12:10 ए एम, जुलाई 20
समाप्त – 11:02 पी एम, जुलाई 20 Also Read - दर्श अमावस्या 2018: आषाढ़ अमावस्या कब, पढ़ें महत्व, पूजन व व्रत विधि

दर्श अमावस्या का महत्व:
इस दिन का व्रत रखने और चंद्रमा की पूजा करने से चंद्र देवता प्रसन्न हो जाते हैं और सौभाग्य व समृद्धि का आर्शीवाद देते हैं. जिससे मानसिक शांति मिलती है. इस तिथि पर पितर धरती पर आते हैं और अपने परिवार जनों को आशीर्वाद देते हैं. इसलिए इस तिथि पर पूर्वजों के लिए प्रार्थना की जाती हैं. पितरों की पूजा होने से इस अमावस्या को श्राद्ध अमावस्या भी कहा जाता है. पितृदोष से मुक्ति पाने के लिए इस दिन पितृ तर्पण, स्नान-दान आदि करना बहुत ही पुण्य फलदायी माना जाता है.

व्रत एवं (Darsh Amavasya 2020 puja vidhi )पूजन विधि

पुराणों के अनुसार अमावस्या के दिन स्नान-दान करने की परंपरा है. वैसे तो इस दिन गंगा-स्नान का विशिष्ट महत्व माना गया है, परंतु जो लोग गंगा स्नान करने नहीं जा पाते, वे किसी भी नदी या सरोवर तट आदि में स्नान कर सकते हैं तथा शिव-पार्वती और तुलसीजी की पूजा करते हैं.