लखनऊ: आज शिवभक्तों का विशेष दिन सावन का पहला सोमवार है और मान्यता है कि सावन में शिव की आराधना करने से भोलेनाथ मनचाही मुराद पूरी करते हैं. देश भर में श्रद्धालुगण बड़ी संख्या में भोलेनाथ के दरबार में पूजन अर्चन के लिए उमड़ रहे हैं. Also Read - Kashi Vishwanath Temple Guidelines: काशी विश्वनाथ और अन्नपूर्णा मंदिर में दर्शन के लिए नए नियम, कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य

बाबा के दरबार में पहुंचे भक्त
महाकाल और काशी विश्वनाथ मन्दिर से लेकर नेपाल के पशुपतिनाथ मन्दिर में सुबह से ही हजारों भक्तों ने भगवान शिव के आगे माथा टेका. इस साल का सावन वैसे भी विशेष है क्योंकि इस बार शनिवार से ही सावन शुरु हो गया है. श्रद्धालु दूर दूर से जल लेकर जलाभिषेक के लिए भगवान भोले के दरबार पहुंच रहे हैं. Also Read - UP Latest News: वाराणसी में विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद पर विवाद, कोर्ट के आदेश पर नाराज हुआ मुस्लिम बोर्ड

पशुपतिनाथ में सुरक्षा के हैं विशेष इन्तेजाम
नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर में भी भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के बड़े पैमाने पर इन्तजाम किये हैं. मंदिर समिति के सचिव एसएल शाक्य ने बताया कि महिला और पुरुषों की अलग अलग कतार बनाई गई हैं और चौबीस घण्टे सीसीटीवी से नजर रखी जाएगी. Also Read - Kashi Vishwanath Gyanvapi Case: काशी में ज्ञानवापी मस्जिद की खुदाई कराएगा ASI, फास्ट ट्रैक अदालत ने दिया सर्वेक्षण कराने का आदेश

सारी मनोकामनाएं होंगी पूरी
पौराणिक कथाओं के अनुसार श्रावण मास में उपवास, पूजा और दान करना समस्त ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के बराबर फल देने वाला होता है. भगवान आराधना में बेलपत्र का भी विशेष महत्त्व है. कहते हैं कि बिल्व पत्थर की जड़ में शिव स्वयं वास करते हैं और इससे पूजा करने पर भक्त को सारे तीर्थों में स्नान करने का फल मिलता है.

महाकाल का नगर भ्रमण
उज्जैन के महाकाल के मंदिर में आज भस्म आरती से पूजा की शुरुआत की गई. भस्म आरती में दूर-दूर से श्रद्धालु पंहुचे. महाकाल का फूलों से श्रृंगार करने के बाद बाबा की आरती शुरू हुई. शाम 4 बजे बाबा महाकाल पालकी में सवार होकर अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकले.

पातालेश्वर में झाड़ू से होती है पूजा
सम्भल जिले के पातालेश्वर मन्दिर में भी भक्त प्रसाद के रूप में झाड़ू चढ़ाने के लिए पहुंच रहे हैं. सादात बाड़ी के इस मन्दिर में यह मान्यता है कि झाड़ू अर्पित करने से चर्म रोग से मुक्ति मिल जाती है. जितनी रोचक यह परम्परा है उतनी ही रोचक इसके पीछे की कहानी भी है. माना जाता है कि गांव के ही एक वैश्य ने सपने में भगवान शिव को देखा और शिव मन्दिर का निर्माण कराया. निर्माण के बाद उसका चर्म रोग किसी चमत्कार की तरह ठीक हो गया. तब से इस मन्दिर में यह अद्भुत परम्परा शुरू हो गई.