Devshayani Ekadashi 2019: देवशयनी एकादशी 12 जुलाई, शुक्रवार को है. इस एकादशी का काफी महत्‍व है. कहा जाता है कि इस दिन से ही चातुर्मास भी आरंभ हो जाता है.

देवशयनी एकादशी व्रत करने और इस दिन भगवान श्रीहरि की विधिवत पूजन से सभी प्रकार के पापों का नाश होता है.

व्रत कथा
एक राजा के राज्य में बरसात नहीं हो रही थी. सारे लोग बहुत परेशान थे और अपनी परेशानी लेकर राजा के पास पहुंचे. हर तरफ अकाल था.

ऐसी दशा में राजा ने भगवान विष्णु की पूजा की. देवशयनी एकादशी का व्रत रखा. इसके फलस्वरूप भगवान विष्णु ने बरसात की और राजा के साथ-साथ सभी लोगों के कष्ट दूर हो गए.

पूजन विधि
इस दिन भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजन की जाती है ताकि चार महीने तक भगवान विष्णु की कृपा बनी रहे.

– भगवान विष्‍णु की मूर्ति या चित्र रखें.
– दीप जलाएं.
– पीली वस्तुओं का भोग लगाएं.
– पीला वस्त्र अर्पित करें.
– भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें. अगर कोई मंत्र याद नहीं है तो सिर्फ हरि के नाम का जाप करें. हरि का नाम अपने आप में एक मंत्र है.
– जप तुलसी या चंदन की माला से जप करें.
– आरती करें.

इस विशेष मंत्र का उच्चारण करें:
सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जमत्सुप्तं भवेदिदम्।
विबुद्दे त्वयि बुद्धं च जगत्सर्व चराचरम्।

पूजन मुहूर्त
हरिशयनी एकादशी 11 जुलाई को रात 3:08 से शुरू होगी. ये 12 जुलाई रात 1:55 मिनट तक रहेगी. प्रदोष काल शाम साढ़े पांच से साढे सात बजे तक रहेगा. माना जाता है कि इस दौरान की गई आरती, दान पुण्य का विशेष लाभ भक्तों को मिलता है.

देवशयनी एकादशी के दिन भगवान को नए वस्त्र पहनाकर, नए बिस्तर पर सुलाएं क्योंकि इस दिन के बाद भगवान सोने के लिए चले जाते हैं.