Devshayani Ekadashi 2020: देवशयनी एकादशी भगवान विष्णु के विश्राम काल आरंभ के समय को बोला जाता है. आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं. देवशयनी एकादशी के दिन से भगवान विष्णु का शयनकाल प्रारम्भ हो जाता है इसीलिए इसे देवशयनी एकादशी कहते हैं. देवशयनी एकादशी प्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा के तुरन्त बाद आती है और अंग्रेजी कैलेण्डर के अनुसार देवशयनी एकादशी का व्रत जून या जुलाई के महीने में आता है. Also Read - Ashadi Ekadashi 2020: जानें क्या है आषाढ़ी एकादशी का महत्व और पौराणिक व्रत कथा

देवशयनी एकादशी को पद्मा एकादशी, आषाढ़ी एकादशी और हरिशयनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है.मान्यता है कि जिस वर्ष 24 एकादशी के स्थान पर 26 एकादशी होती हैं तो चार्तुमास अधिक लंबा होता है. इस कारण इस बार चार्तुमास की अवधि लगभक 5 माह की रहेगी. देवशयनी एकादशी को पद्मनाभा भी कहा जाता है. चार्तुमास आरंभ होते हैं भगवान विष्णु धरती का कार्य भगवान शिव को सौंप देते हैं. भगवान शिव चार्तुमास में धरती के सभी कार्य देखते हैं. इसीलिए चार्तुमास में भगवान शिव की उपासना को विशेष महत्च दिया गया है. सवान का महीना भी चार्तुमास में ही आता है. Also Read - Devshayani Ekadashi 2019: ऐसे करें विष्‍णु पूजन, व्रत कथा, पूजन विधि, जानें शुभ मुहूर्त...

देवशयनी एकादशी पारण Also Read - चातुर्मास 2019: देवशयनी एकादशी से होगी चौमासा की शुरुआत, चार महीने नहीं होंगे मांगलिक कार्य...

पारण (व्रत तोड़ने का) समय = 2 जुलाई, 05:32 to 04:14
एकादशी तिथि प्रारम्भ =30 जून, 2020, 19:49 बजे से
एकादशी तिथि समाप्त = 1 जुलाई, 2020 को 14:29 बजे

एकादशी के व्रत को समाप्त करने को पारण कहते हैं. एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है. एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना अति आवश्यक है. यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो गयी हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही होता है. द्वादशी तिथि के भीतर पारण न करना पाप करने के समान होता है.