Dhanteras 2018 Pujan Vidhi: आज धनतेरस का त्योहार पूरे देश में धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है. इस मौके पर लोग भगवान धन्वंतरि, कुबेर देवता और मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं. इसके साथ ही आज भगवान गणेश, भगवान विष्णु और भगवार शंकर की भी पूजा की जाती है. Also Read - मुहूर्त कारोबार: NSE Sensex अपनी सर्वकालिक ऊंचाई पर, BSE में लगभग सभी क्षेत्र लाभ में

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धनतेरस का पर्व हर वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की तेरस यानी त्रयोदशी को मनाया जाता है. ऐसी मान्यता है कि इसी दिन आयुर्वेद के जनक धन्वंतरि देव का जन्म हुआ था. वह समुद्र मंथन के दौरान अमृत का कलश और आयुर्वेद लेकर प्रकट हुए थे. ऐसे में आज के दिन उनसे सेहत की कामना की जाती है, जो सबसे बड़ा धन है. Also Read - Gold Silver Rate Today: धनतेरस पर बढ़ी सर्राफा बाजार की रौनक, जानिए- कितना है सोने-चांदी का दाम

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धनतेरस पर पूजन का शुभ मुहूर्त:

धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त: 5 नवंबर को शाम 6.05 बजे से 8.01 बजे

शुभ मुहूर्त की अवधि: 1 घंटा 55 मिनट

प्रदोष काल: शाम 5.29 से रात 8.07 बजे तक

वृषभ काल: शाम 6:05 बजे से रात 8:01 बजे तक

त्रयोदशी तिथि आरंभ: 5 नवंबर को सुबह 01:24 बजे

त्रयोदशी तिथि खत्म: 5 नवंबर को रात्रि 11.46 बजे

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धनतेरस पर खरीदारी का शुभ मुहूर्त

सुबह 07:07 से 09:15 बजे तक

दोपहर 01:00 से 02:30 बजे तक

रात 05:35 से 07:30 बजे तक

धनतेरस के दिन पूजन की सरल और पौराणिक विधि:

1. सबसे पहले साफ लकड़ी की चौकी लें और उस पर लाल वस्त्र बिछाएं.

2. उस पर भगवान धन्वंतरि और मिट्टी के हाथी को स्थापित करें. आप मूर्ति या फोटो रख सकते हैं.

3. भगवान गणपति, मां लक्ष्मी, भगवान विष्णु और भोलेनाथ को भी चौकी पर स्थान दें.

4. इसके बाद गंगा जल या शुद्ध जल से आचमन करें. जल तांबे या चांदी के आचमनी में ही रखें.

5. भगवान गणपति के पूूूूजन से पूजा शुरू करें.

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6. अब हाथ में अक्षत-पुष्प लेकर भगवान धन्वंतरि का ध्यान करें और इस मंत्र का जाप करें.

देवान कृशान सुरसंघनि पीडितांगान

दृष्ट्वा दयालुर मृतं विपरीतु कामः

पायोधि मंथन विधौ प्रकटौ भवधो

धन्वन्तरि: स भगवानवतात सदा नः

ॐ धन्वन्तरि देवाय नमः

ध्यानार्थे अक्षत पुष्पाणि समर्पयामि…

7. इसके बाद फूल अर्पित करें और जल का आचमन करें.

8. 3 बार जल के छींटे दें और इस मंत्र का जाप करें:

पाद्यं अर्घ्यं आचमनीयं समर्पयामि।

9. भगवान धन्वंतरि के चित्र का जल के छींटों और मंत्र से स्नान कराएं.

10. इत्र छिड़कें और वस्त्र व मौली चढ़ाएं. अक्षत, फूल, अगरबत्ती जलाएं और दीप जलाएं.

11. रोली से तिलक लगाएं.

12. प्रसाद चढ़ाएं और प्रसाद के आसपास पानी छोड़ें.

13. पान, चांदी या सोने के सिक्के चढ़ाएं या घर में रखे रुपये चढ़ाएं.

14. आरती गाएं.

15. आखिर में भगवान से स्वास्थ्य, धन और शांति का वरदान मांगे और प्रार्थना करें.

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