एक ऐसा रहस्यमयी कुआं जो देता है मौत की चेतावनी! यहां शिवजी के साथ विराजते हैं यमराज

Dharmeshwar Mahadev Temple: देश के हर कोने में भगवान के कई लोकप्रिय मंदिर स्थित हैं और कुछ मंदिर ऐसे रहस्यों को समेटे हुए हैं जिनके बारे में जानकर हर कोई हैरान रह जाता है.

Published date india.com Published: February 25, 2025 12:11 PM IST
एक ऐसा रहस्यमयी कुआं जो देता है मौत की चेतावनी! यहां शिवजी के साथ विराजते हैं यमराज

Dharmeshwar Mahadev Temple: काशी को देवो के देव महादेव की नगरी कहा जाता है क्यों​कि यह विश्व प्रसिद्ध बाबा विश्वनाथ का धाम है. जहां दर्शन करने के लिए दुनियाभर से भक्तजन पहुंचते हैं. काशी की विशेषता है कि यहां का हर मंदिर अपने आप में खास और महत्वपूर्ण है. यहां आपको जगह-जगह भगवान शिव के कई मंदिर दिखेंगे जो कि पौराणिक कथाओं से जुड़े हुए हैं. काशी में स्थित ऐसा ही लोक​प्रिय मंदिर है धर्मेश्वर महादेव और इसे लेकर विभिन्न प्रकार की मान्यताएं हैं. इस मंदिर की खासियत है कि यहां भगवान शिव के साथ यमराज भी विराजते हैं. इसके अलावा इस मंदिर में एक रहस्यमयी कुआं भी मौजूद है.

क्यों भोलेनाथ के साथ यमराज विराजते हैं?

भगवान शिव ने यमराज को यही पर यम की उपाधि दी थी. प्रचलित लोक​कथा के अनुसार एक समय भगवान शिव धरती में मरने वाले लोगों के स्वर्ग और नरक में जाने को काफी चिंतित ​थे. उसी दौरान यम ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए काशी में तपस्या कर रहे थे और बार-बार असफल हो रहे थे. जिसके बाद ​भगवान विष्णु ने उन्हें काशी में ही एक कुंड बनाकर उसमें स्नान करने के बाद 16 चौकड़ी अराधना करने की सलाह दी. भगवान विष्णु के कहे अनुसान यम ने ऐसा ही किया और फिर से तप आरंभ किया. उनके तप से प्रसन्न होकर भगवान ​शिव ने उन्हें यमराज का नाम दिया और मोक्ष पाने वालों का हिसाब रखने की जिम्मेदारी भी यमराज को दी.

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यह कुआं देता है मौत का संकेत

धर्मेश्व मंदिर में मौजूद कुआं ही वह कुंड है जिसका निर्माण स्वयं यमराज ने किया था और मान्यता है कि यह कुआं व्यक्ति को मुत्यु के नजदीक आने का इशारा देता है. कहा जाता है कि जो कि इस मंदिर में भगवान शिव और यमराज के दर्शन के लिए जाते हैं वह इस कुएं को भी देखते हैं. यदि कुएं में व्यक्ति की परछाई दिखाई न दे तो अगले 6 महीनों में उसकी मृत्यु हो जाती है.

हालांकि, यह वहां के लोगों की मान्यता है कि इस बात को अभी तक कोई भी प्रमाण सामने नहीं आया है. ऐसा माना जाता है कि यमराज ने यहीं भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तप किया था जिसके बाद उन्हें मनुष्य के स्वर्ग व नरक में जाने का हिसाब-किताब रखने की जिम्मेदारी मिली.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.

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