Diwali 2018: हिन्दू पंचांग में आने वाले सभी त्योहारों में दिवाली का इंतजार सबसे ज्यादा रहता है. इस बार दिवाली का पर्व 7 नवंबर को मनाया जा रहा है. हालांकि कर्नाटक, केरल और तमिलनाडुु में इसे 6 नवंबर को ही मनाया गया. सिंगापुर में मौजूद हिन्दुओं ने भी 6 नवंबर को ही दिवाली मनाई है.

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दिवाली का सेलीब्रेशन करीब 5 दिनों तक चलता है. धनतेरस से शुरू होकर भइया दूज पर जाकर यह पर्व समाप्त होता है. कार्तिक मास की अमावस्या को दिवाली का त्योहार मनाया जाता है. दीपावली को दीपों का पर्व कहा जाता है, प्रकाश का पर्व कहा जाता है. इस दिन लोग अपने घर में, दुकानों में लक्ष्मी, गणेश और सरस्वती की पूजा करते हैं.

शास्त्रों में ऐसा वर्णन है कि इस दिन भगवान राम 14 साल का बनवास काटकर अयोध्या लौटे थे. उनके स्वागत की खुशी में ही दिवाली का पर्व मनाया जाता है. दिवाली के दौरान नई चीजों की खरीदारी करना शुभ माना जाता है. जो लोग दिवाली मनाते हैं, वह पहले अनने घर की साफ सफाई करते हैं, घर की टूटी-फूटी चीजों या तो जोड़वाते हैं या उन्हें कबाड़ में निकाल देते हैं.

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दिवाली के दिन इस मंत्र से करें मां लक्ष्मी का पूजन :

1. मां लक्ष्मी की पूजा करने से पहले यह जरूरी है कि आप अपने मन को शांत और शुद्ध करें. इसके लिए आपको इस मंत्र का जाप करना होगा. यही नहीं इस मंत्र का यदि सवा लाख बार जप किया जाए तो अपार धन की प्राप्ति हो सकती है.

‘ऐं ह्रीं श्रीं ज्येष्ठा लक्ष्मी स्वयंभुवे ह्रीं ज्येष्ठायै नमः’

2. इसके अलावा अगर आप चाहते हैं कि पूरे साल मां लक्ष्मी की कृपा आप पर बनी रहे तो आपको इस मंत्र का जाप करना चाहिए. इसका 1008 बार जप करें.

‘नमो धनदायै स्वाहा’

3. अगर आप किसी इच्छा की प्राप्ति हेतु मां के मंत्र का जप करना चाहते हैं तो यह मंत्र जपें.

‘श्रीं ह्रीं स्वाहा’

लक्ष्मी पूजन का शुभ लग्न:

मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए और घर में मां लक्ष्मी को हमेशा के लिए निवास कराने के लिए जातकों को हमेशा स्थिर लग्न में पूजा करनी चाहिए. इस बार स्थिर लग्न वृश्चिक प्रातः 8:10 से 9:45 तक. कुम्भ दोपहर 01:30 से 03:05 तक, वृष सायंकाल 6:15 से रात्रि 8:05 तक और सिंह रात्रि 12:45 से 02:50 तक रहेगा. आप शाम 5.57 से 7.53 बजे तक पूजन कर सकते हैं.

लक्ष्मी पूजन कभी भी चर लग्न में नहीं करना चाहिए. दरअसल इस लग्न में पूजन करने से लक्ष्मी कभी घर में टिकती नहीं हैं. वही द्विस्वभाव लग्न में पूजन से उनका आना-जाना लगा रहता है. स्थिर लग्न में पूजन सबसे शुभ माना जाता है.

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