इस बार दिवाली 2020 (Diwali 2020) पर बहुत खास संयोग पड़ रहा है. दरअसल तंत्र पूजा के लिए दीपावली पर्व को विशेष माना जाता है. इस वर्ष 14 नवंबर, दिन शनिवार को दिवाली तिथि पड़ी है. ज्योतिष विशेषज्ञों की मानें तो सन 1521 के 499 साल बाद ग्रहों का दुलर्भ योग देखने को मिलेगा. माना जाता है कि आर्थिक स्थिति को मजबूत करने वाला ग्रह गुरु और शनि है. ऐसे में इस वर्ष दीपावली पर धन संबंधी कार्यों में बड़ूी उपलब्धि मिल सकती है, क्योंकि ये दोनों ग्रह अपनी राशि में होंगे.Also Read - Delhi Metro Time Table: आज के लिए बदल गया मेट्रो का टाइम टेबल, ये खबर पढ़कर ही निकलें बाहर

दरअसल, 14 नवंबर को देश भर में दीपावली में गुरु ग्रह अपनी राशि धनु में और शनि अपनी राशि मकर में रहेंगे. वहीं, शुक्र ग्रह कन्या राशि में नीच रहेगा. इन तीनों ग्रहों का यह दुर्लभ योग वर्ष 2020 से पहले सन 1521 में 9 नवंबर को देखने को मिला था. इसी दिन उस वर्ष दीपोत्सव मनाई गई थी. गुरु और शनि ग्रह आर्थिक स्थिति को मजबूत करने वाले माने जाते हैं. Also Read - Happy Diwali: पीएम मोदी ने दी दीपावली की शुभकामनाएं, इस बार J&K के नौशेरा में मनाएंगे दिवाली

दीपावली का शुभ मुहूर्त
14 नवंबर को चतुर्दशी तिथि पड़ रही है जो दोपहर 1:16 तक रहेगी. इसके बाद अमावस तिथि का आरंभ हो जाएगा जो 15 नवंबर की सुबह 10:00 बजे तक रहेगी. हालांकि, 15 तारीख को केवल स्नान दान की अमावस्या की जाएगी. गौरतलब है कि लक्ष्मी पूजा संध्याकाल या रात्रि में दिवाली में की जाती है. Also Read - Spicejet vs Cock Brand before Diwali: स्पाइस जेट के 'नो क्रैकर्स' विज्ञापन पर पटाखा कंपनी का 'धमाकेदार' जवाब

धनतेरस एक दिन पहले होता है
दिवाली से एक दिन पहले धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है. हिंदू धर्म में धनतेरस पर नए सामान खरीदना शुभ माना जाता है. आपके लिए खरीदारी का शुभ मुहूर्त 6 बजकर 1 मिनट से शुरू होकर 8 बजकर 33 मिनट पर खत्म रहेगा. दिवाली में मां लक्ष्मी के साथ-साथ श्री यंत्र की पूजा की जाती है. ज्योतिष विशेषज्ञों की मानें तो इस दीपावली गुरु धनु राशि में रहेगी ऐसे में श्री यंत्र की पूजा रात भर कच्चे दूध से करना लाभदायक हो सकता है.

दिवाली पर इन्हें भी पूजें
दिवाली पर केवल महालक्ष्मी की ही नहीं बल्कि साथ ही साथ भगवान विष्णु की पूजा अर्चना भी श्रद्धा पूर्वकर की जानी चाहिए, तब ही मां प्रसन्न होती है. इसके अलावा इस दिन यमराज, चित्रगुप्त, कुबेर, भैरव, हनुमानजी, कुल देवता व पितरों का भी श्रद्धा पूर्वक पूजना चाहिए.