Diwali 2020: दिवाली (Diwali) पर लोग घरों की साफ-सफाई करते हैं. मां लक्ष्मी (Maa Laxmi) के आगमन की तैयारियां कई दिन पहले से ही आरंभ हो जाती हैं. दीपों के इस महापर्व में सब देवी लक्ष्मी (Goddess Laxmi) को प्रसन्न करना चाहते हैं. Also Read - कर्नाटक की IPS ऑफिसर बोलीं- पटाखे जलाना 'हिंदू ट्रेडिशन' का हिस्सा नहीं, हो गईं ट्रोल

दीपावली पर मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए लोग कई तरह के उपाय करते हैं. पर वास्तु शास्त्र में कुछ खास उपायों के बारे में बताया गया है. इन्हें करने से देवी लक्ष्मी निश्चित तौर पर घर में आती हैं. Also Read - सुशांत की बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने इन लोगों से कहा- शुक्रिया, VIDEO शेयर कर जताया आभार, जानिए वजह

जानें मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के 7 अचूक उपाय-

– वास्तु शास्त्र में कहा गया है कि दिवाली पर घर की चौखट को अवश्य सजाना चाहिए. इसके लिए मुख्य द्वार पर तोरण, फूल, रंगोली बनाने चाहिए. इसके अलावा ऐसी व्यवस्था हो कि यहां रौशनी रहे. मुख्य द्वार पर अंधेरा ना हो. Also Read - आश्रम की 'पम्मी' ने दिया अपने घर की रंगोली और दीया का Inside View, Aditi Pohankar की दिवाली मेमोरी

– घर में पोंछा लगाएं तो चुटकी भर नमक पोंछे के पानी में मिला दें. घर की सफाई सुबह ही होनी चाहिए. इसके बाद ईश्वर का पूजन करें. घर में चारों ओर सुगंध होनी चाहिए. मां लक्ष्मी को सुगंध भरा वातावरण बेहद भाता है.

– तोरण केवल सजावट की चीज नहीं है. इसका धार्मिक महत्व भी है. इसे शुभ माना गया है. इससे घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. पहले के समय में फूल व आम या अशोक के पत्ते से तोरण तैयार कर लगाए जाते थे. इन्हें लगाना चाहिए. ये संभव ना हो तो बाजार में बिक रहे तोरण भी लगा सकते हैं.

– घर में अच्छी तरह से साफ-सफाई हो. कोई सामान बिखरा ना हो. मुख्य द्वार के बाहर कूड़ा या अन्य गंदा सामान ना हो. ईंट-पत्थरों या अन्य तरह का मलबा भी ना हो. वास्तु शास्त्र में कहा गया है कि अगर घर के सामने गंदगी हो तो लक्ष्मी जी घर में प्रवेश नहीं करतीं.

– घर के हर कोने में गंगाजल छिड़कें. जिससे घर पूजन से पहले पवित्र हो जाए.

– स्वास्तिक अवश्य बनाएं. मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए स्वास्तिक बनाना अनिवार्य है. घर की दीवारों पर बनाएं. स्वास्तिक से मां लक्ष्मी आकर्षित होती हैं.

– हमेशा पूजा में बैठने का आसन उत्तर दिशा की ओर लगाएं. मां लक्ष्मी, कुबेर जी की फोटो या मूर्ति को दक्षिण की ओर रखें. फिर पूजन करें.