Diwali Laxmi Puja 2018 Muhurat and Puja Vidhi: दिवाली के दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है. शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान राम ने 14 साल बनवास काटकर अयोध्या वापसी की थी. उनके स्वागत के लिए अयोध्या को दीप से सजा दिया गया था. तभी से दीपावली का त्योहार मनााय जाने लगा. Also Read - Happy Diwali 2020 Wishes,SMS & Quotes: दिवाली पर अपनों को भेजे इन संदेशों के जरिए शुभकामनाएं, हर कोई होगा खुश

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ऐसा भी कहा जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी और गणपति अपने भक्तों की पूजा स्वीकार करने धरती पर जरूर उतरते हैं. जिस भक्त के पूजन से देवी प्रसन्न हो जाती हैं, वह उनके घर में वास करती हैं. Also Read - Diwali Rangoli Ideas 2020: इस बार दिवाली पर नहीं है समय तो कम वक्त में ऐसे तैयार करें रंगोली, यहां पर जानें आसान टिप्स

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पूजा की विधि

1. सबसे पहले श्री गणेश का पूजन करें. भगवान गणेश को स्नान कराएं. वस्त्र अर्पित करें. गंध, पुष, अक्षत अर्पित करें.

2. अब देवी लक्ष्मी का पूजन शुरू करें.

3. माता लक्ष्मी की चांदी, पारद या स्फटिक की प्रतिमा का पूजन से भी उत्तम फल की प्राप्ति होती है. जिस मूर्ति में माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है. उसे अपने पूजा घर में स्थान दें. मूर्ति में माता लक्ष्मी आवाहन करें. आवाहन यानी कि बुलाना. माता लक्ष्मी को अपने घर बुलाएं. माता लक्ष्मी को अपने-अपने घर में सम्मान सहित स्थान दें.

4. अब माता लक्ष्मी की मूर्ति को स्नान कराएं. स्नान पहले जल से फिर पंचामृत से और दोबारा जल से स्नान कराएं.

5. इसके बाद माता लक्ष्मी को वस्त्र अर्पित करें. वस्त्रों के बाद आभूषण पहनाएं. अब पुष्पमाला पहनाएं. सुगंधित इत्र अर्पित करें.

6. अब कुमकुम तिलक करें. अब धूप व दीप अर्पित करें. माता लक्ष्मी को गुलाब के फूल विशेष प्रिय है.

7. बिल्वपत्र और बिल्व फल अर्पित करने से भी महालक्ष्मी की प्रसन्नता होती है.

8. 11 या 21 चावल अर्पित करें. श्रद्धानुसार घी या तेल का दीपक लगाएं. देवी लक्ष्मी की पूजा के ल‌िए दीपक की बाती का रंग लाल होना चाहिए. दीपक को दाईं ओर रखें. दीपक बाईं ओर नहीं रखना चाह‌िए.

9. आरती करें. आरती के पश्चात परिक्रमा करें.

10. अब नेवैद्य अर्पित करें. महालक्ष्मी पूजन के दौरन ‘ऊँ महालक्ष्मयै नमः’ इस मंत्र का जप करते रहें.

दीपावली 2018 पूजन मुहूर्त :

दिवाली का पूरा दिन ही शुभ होता है. इसलिए आप किसी भी समय पूजा कर सकते हैं. खासतौर से ऐसे लोग जो सिर्फ लक्ष्मी गणेश की पूजा करते हैं, उन्हें राहुकाल के बारे में सोचने की या चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अमावस्या कि दिन राहुकाल का दोष नहीं लगता है.

दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजा के चार मुहूर्त हैं.

1. सुबह 8 बजे से 9:30 बजे तक

2. सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक

3. दोपहर 1:30 बजे से शाम को 6 बजे तक

4. शाम को 7:30 बजे से रात के 12:15 बजे तक

आप इन चारों मुहूर्त में से किसी भी मुहूर्त में पूजन कर सकते हैं.

अमावस्या तिथि शुरू कब से हो रही है: 6 नवम्बर को रात 10:03 बजे,

अमावस्या तिथि समाप्त कब होगी: 7 नवम्बर को रात 9:32 बजे

आयुष्मान योग: 7 नवंबर को शाम 05:57 बजे तक रहेगा. इसके बाद सौभाग्य योग प्रारंभ हो जाएगा.

स्थिर लग्न:

स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजन को सबसे अच्छा माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस लग्न में लक्ष्मी पूजन से मां जल्दी प्रसन्न होती हैं और घर में निवास कर जाती हैं. जानिये स्थिर लग्न कब से कब तक है.

वृश्चिक प्रातः 8:10 से 9:45 तक. इस लग्न से ग्रहों की स्थिति विशेष प्रभावी नहीं है.

कुम्भ दोपहर 01:30 से 03:05 तक

वृष सायंकाल 6:15 से रात्रि 8:05 तक

सिंह रात्रि 12:45 से 02:50 तक

आरती श्री लक्ष्मी जी

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।

तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।

सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।

जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।

कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।

सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।

खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता।

रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।

उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

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