नवरात्रि का समापन हो चुका है और कल दशहरे के साथ माता दुर्गा को विदा करने का समय आ गया है. माता को आज विसर्जन किया जाएगा. हर साल आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन किया जाता है.शारदीय नवरात्र के मौके पर हर साल कई जगहों पर माता की मूर्ति स्थापित की जाती है जिसे दशहरे के बाद विसर्जित किया जाता है. इस दौरान बंगाली महिलाएं सिंदूर खेला करके मां को विदा करती हैं. Also Read - Navratri 2020: नवरात्रि में मां के भक्त हर दिन पहनें अलग रंग के कपड़े, मिलेगा मोक्ष और आशीर्वाद

दुर्गा विसर्जन 26 अक्टूबर को यानी कि आज होगा. सुबह 8 बजकर 43 मिनट तक विसर्जन का मुहूर्त समाप्त हो जाएगा. दुर्गा विसर्जन की अवधि महज 2 घंटे 14 मिनट की ही है. दशमी तिथि का समापन 26 अक्टूबर सुबह 9 बजे होगा. आज यानी कि 26 अक्टूबर रात 1 बजकर 28 मिनट से श्रवण नक्षत्र लग जाएगा. Also Read - Mahalaya 2020 : महालया अमावस्या आज मां दुर्गा की होगी पूजा, 17 अक्टूबर से शुरू होगी नवरात्रि

दुर्गा मूर्ति विसर्जन का महत्व
आपने सुना होगा ये कहा जाता है कि दुनिया पांच चीजों से बनी है जो कि है आकाश, जल, अग्नि और वायु से मिलकर बना है. जल भी पंचत्वों में से एक है और पवित्र है, क्योंकि हर गुण दोष को अपने अंदर ले लेता है और पूजा में इसका इस्तेमाल किया जाता है. हिंदू पुराणों में जल को ब्रह्म माना गया है और यही वजह है कि पूजा में इसका खास महत्व होता है. पुराणों में लिखा है कि प्रतिमाओं को विसर्जित इसलिए किया जाता है क्योंकि इससे उनके प्राण मूर्ति से निकलकर सीधे परम ब्रह्म में लीन हो जाते हैं. इसलिए हर पूजा के बाद देवी देवताओं की मूर्ति को विसर्जित किया जाता है. Also Read - TMC सांसद नुसरत जहां ने 'सिंदूर खेला' में लिया हिस्सा, आलोचना पर दिया ये जवाब

दुर्गा मूर्ति विसर्जन के मुहूर्त – (26 अक्टूबर)
-सुबह 6.30 बजे से 8.35 बजे तक .
– सुबह 10.35 बजे से 11.30 बजे तक.