Durva Ashtami 2021 Date:  दूर्वा अष्टमी (Durva Ashtami Kab Hai) का पर्व भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन दूर्वा घास का पूजन करने की परंपरा है. मान्यता है कि, दूर्वा अष्टमी के दिन दूर्वा की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और परिवार व कुल की वृद्धि होती है. साल 2021 में दूर्वा अष्टमी का पर्व 13 सितंबर 2021 को मनाया जाएगा.Also Read - Today’s Panchang, September 13, 2021: दूर्वा अष्टमी आज, जानें आज का शुभ और अशुभ समय, पढ़ें पंचांग

दूर्वा अष्टमी पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मन्थन के समय भगवान विष्णु कूर्म अवतार धारण करके मन्दराचल पर्वत की धुरी में विराजमान हो गये. मन्दराचल पर्वत के तीव्र गति से घूमने के कारण, उसकी रगड़ से भगवान विष्णु की जंघा से कुछ रोम निकलकर समुद्र में गिर गये. अमृत के प्रभाव से भगवान विष्णु के रोम पृथ्वीलोक पर दूर्वा घास के रूप में उत्पन्न हुये. इसलिये दूर्वा को अत्यन्त पवित्र माना जाता है तथा दुर्वाष्टमी पर दूर्वा घास का पूजन किया जाता है.

दूर्वा अष्टमी पूजा समय (Durva Ashtami 2021 Samay)

दूर्वा अष्टमी सोमवार, सितम्बर 13, 2021 को
अष्टमी तिथि प्रारम्भ – सितम्बर 13, 2021 को 03:10 पी एम बजे
अष्टमी तिथि समाप्त – सितम्बर 14, 2021 को 01:09 पी एम बजे

दूर्वा अष्टमी की व्रत विधि (Durva Ashtami 2021 Vrat Vidhi)

भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन प्रात:काल स्नान आदि से निवृत्त होने के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करें और उसके पश्चात व्रत का संकल्प लें. पूजा स्थल पर देवताओं को फल-फूल, चावल, धूपबत्ती, दही और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें. इस दिन दूर्वा अष्टमी के पालनकर्ता भगवान गणेश और शिव की विधिवत पूजा करके भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करें. मान्यता है कि इस दिन महिलाओं द्वारा पूरी श्रद्धा के साथ व्रत-पूजा और भोग अर्पित करने से घर में सुख समृद्धि व खुशियां आती हैं. दूर्वा अष्टमी के दिन भगवान गणेश को तिल और मीठे आटे से बनी रोटी का भोग लगाया जाता है. पूजन के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराएं और वस्त्र का दान करें.