Dussehra 2018: दशहरा को विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है. इस साल विजयदशमी या दशहरा 19 अक्टूबर को मनाया जाएगा. विजयदशमी दरअसल, दो शब्द ‘विजय’ और ‘दशमी’ से मिलकर बना है. विजय का अर्थ जीत और दशमी का अर्थ होता है दसवां दिन. यानी दशमी को प्राप्त होने वाला विजय. नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा की पूजा करने के बाद दसवें दिन विजयदशमी मनाई जाती है, यह एक तरह से बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है. ‘दशहरा’ शब्द संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है, ‘दशा’ और ‘हरा’. इन दोनों शब्द का अर्थ होता है दस और हराना. Also Read - जहां प्रदूषण, वहां कोरोना से मौत के चांस अधिक, क्या ये दिल्ली जैसे शहरों के लिए खतरे की घंटी?

Also Read - अब Metro Train में मनाएं बर्थडे का जश्न, ऐसे होगी बुकिंग और जानें किराया

दशहरा अश्विन माह के शुक्ल पक्ष के 10वें दिन मनाया जाता है. इसे देश के विभिन्न राज्यों में धूमधाम से मनाया जाता है. खासतौर से पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा का उत्सव नवरात्रि के 6वें दिन से ही शुरू हो जाता है और विजयदशमी तक चलता है. दशमी के दिन दुर्गा विसर्जन होता है. Also Read - पराली जलाने को रोकने में नाकाम रहने पर उत्तर प्रदेश के 26 जिलाधिकारियों को नोटिस

Happy Navami 2018: महानवमी पर अपनों को भेजें जबरदस्‍त Wishes, Messages, Quotes, Images और Whatsapp Status

ऐसी मान्यता है कि मां दुर्गा नौ दिन और नौ रातों तक असुर महिषासुर से युद्ध करती रहीं और दसवें दिन उन्होंने महिषासुर का वध कर दिया. इसलिए नवरात्रि के दसवें दिन को विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है.

उत्तर भारत में दशहरा के दिन रावण के पुतले को जलाया जाता है. रावण के साथ भाई कुंभकरण और बेटे मेघनाद के पुतले को भी जलाया जाता है. इसके साथ यह कहानी है कि भगवान राम ने रावण को मारकर आज ही के विजय प्राप्त किया था. इसे बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में भी देखा जाता है.

दशहरा के दिन राम लीला का भी चलन है. लोग दशहरा से कुछ दिन पूर्व ही रामलीला शुरू कर देते हैं और रामायण कथा का मंचन करते हैं. इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होते हैं.

प्रदूषण का रखें ध्यान

दशहरा के दिन रावण, कुंभकरण और मेघनाद का पुतला जलाया जाता है और इन तीनों के पुतले जलाने के लिए इनके पुतलों में खूब सारे पटाखे लगाए जाते हैं. लेकिन दिल्ली और भारत के कई अन्य शहरों में जिस तेजी से प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है, उसे देखते हुए यह बात गौर करने वाली है कि क्या हम किसी ईको-फ्रेंडली तरीके से दशहरा का त्योहार नहीं मना सकते.

क्योंकि दशहरा के दिन जब ऊंचे-ऊंचे रावण के पुतले जलाए जाते हैं तो प्रदूषण का स्तर कई गुणा बढ़ जाता है. आप मान कर चलें कि हर मोहल्ले में एक रावण का पुतला तो जरूर जलाया जाता है और उस पुतले में तरह-तरह के सैकड़ों पटाखे लगाए जाते हैं.

Durga Puja 2018: दिल्ली में बसता है मिनी-बंगाल, देखिए ये खास तस्वीरें

ऐसे में उन लोगों की परेशानियां और भी बढ़ जाती हैं, जो सांस और दिल से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे हैं. हालांकि रावण का पुतला जलाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है, इसलिए इसे पूरी तरह से खत्म करना संभव नहीं हो पाएगा. लेकिन दशहरा का त्योहार साधारण और सरल तरीके से भी मनाया जा सकता है, जिससे ना तो पर्यावरण को कोई नुकसान पहुंचेगा और ना ही बीमारियों का खतरा होगा. हम यहां कुछ ऐसे ही तरीके बता रहे हैं:

1. पुतलों में लगने वाले पटाखों की संख्या न्यूनतम कर दें.

2. हर मोहल्ले में पुतला जलाने की बजाय, कई मोहल्ला एक साथ मिलकर पुतला जला लें.

3. पुतलों को जलाने के लिए पटाखों की जगह दीप का प्रयोग किया जाए. पुतलों को ऐसी चीजों से ही तैयार करें, जिसे जलाने के लिए पटाखों की जरूरत ना पड़े.

4. दशहरा के दिन पटाखों की जगह दीप जलाएं. इससे वातारण शुद्ध रहेगा और सुंदर भी लगेगा.

धर्म से जुड़ी अन्य खबरों को पढ़ने के लिए धर्म पर क्लिक करें.