शारदीय नवरात्रि चल रही है और हर दिन मां दुर्गा के अलग-अलग रुपों के पूजा हो रही है. हालांकि अब मां के पूजा में महज कुछ ही दिन बचे हैं और दशहरा बेहद करीब आ चुका है. दशहरा (Dussehra 2020) बुराई पर अच्छाई की जीत का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है. हिंदू पचांग के अनुसार, दशहरा दीवाली से ठीक 20 दिन पहले आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है.विजय दशमी का पर्व इस साल रविवार, 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा. पितृपक्ष के बाद अधिकमास लगने की वजह से नवरात्र, दशहरा और सभी एक महीने देर से आएंगे. 17 अक्टूबर से नवरात्रि का शुभारंभ होगा और 24 अक्टूबर को रामनवी के अगले ही दिन पूरे देश में दशहरे का पर्व मनाया जाएगा. Also Read - RSS प्रमुख के चीन को लेकर दिये बयान पर आया राहुल गांधी का रिएक्शन, कहा- 'भागवत सच जानते हैं लेकिन...' 

दशहरा को बुराई पर अच्छाई की जीत पर सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है. नवरात्रि दशहरा हिन्दू धर्म का प्रमुख त्योहार है. इस त्योहार को बुराई पर अच्छाई की जीत और असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता. हर साल यह पर्व आश्विन मास शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन मनाया जाता है. पूरे देश में विजयादशी के दिन रावण के पुतले को फूंकने की परंपरा है. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर इस साल कब मनाया जाएगा दशहरा और क्या है शुभ मुर्हूत. Also Read - 'शस्त्र पूजा' के बाद चीन को राजनाथ सिंह का सख्त संदेश- 'सीमा पर चाहते हैं शांति लेकिन एक इंच भी जमीन...'

कब है दशहरा
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को हर वर्ष दशहरा या विजयादशमी का त्योहार मनाया जाता है. इस बार ये तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 41 मिनट से शुरु हो रही है जो अगले दिन 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजे तक चलेगी. ऐसे में इस बार दशहरा या विजयादशमी का त्योहार 25 अक्टूबर दिन रविवार को मनाया जाएगा. Also Read - Mohan Bhagwat Dussehra Speech 2020: दशहरे पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने की शस्त्र पूजा, कहा - भारत की प्रतिक्रिया से सहम गया चीन

विजयादशमी पूजा मुहूर्त
विजयादशमी की पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 12 मिनट से दोपहर 03 बजकर 27 मिनट तक है. इस दिन विजयादशमी का मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 57 मिनट से दोपहर 02 बजकर 42 मिनट तक है. इस दिन भगवान राम, देवी अपराजिता तथा शमी के पेड़ की पूजा की जाती है.

विजयादशमी का महत्व
इस दिन भगवान राम सिता माता को रावण की लंगा से मुक्त करके लाए थे. रावण पर भगवान राम के विजय की खुशी में हर वर्ष दशहरा मनाया जाता है. इसके साथ ही मां दुर्गा ने महिषासुर का अंत कर देवताओं को मनुष्यों पर उपकार किया था, इस हर्ष में भी दशहरा मनाया जाता है. विजयादशमी या दशहरा बुराई पर अच्छाई तथा असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है.

दशहरे के दिन होती है शस्त्र पूजा
इस दिन महिषासुर मर्दिनी मां दुर्गा और भगवान राम की पूजा करनी चाहिए. इससे सम्पूर्ण बाधाओं का नाश होगा और जीवन में विजय श्री प्राप्त होगी. इस दिन अस्त्र-शस्त्र की पूजा करना बड़ा फायदेमंद होता है. दशहरे के दिन शस्त्रों की पूजा होता है, इस दिन सनातन परंपरा में शस्त्र और शास्त्रा दोनों का खास महत्व है. शास्त्र की रक्षा और आत्मरक्षा के लिए धर्मसम्म्त तरीके से शस्त्र का प्रयोग होता है.

विजय दशमी पर पूजा के फायदे
इस दिन महिषासुर मर्दिनी मां दुर्गा और भगवान राम की पूजा करनी चाहिए. इससे सम्पूर्ण बाधाओं का नाश होगा और जीवन में विजय श्री प्राप्त होगी. इस दिन अस्त्र-शस्त्र की पूजा करना बड़ा फायदेमंद होता है. नवग्रहों को नियंत्रित करने के लिए भी दशहरे की पूजा अद्भुत होती है.