Eid-ul-Adha 2020: जानें आखिर क्यों मनाया जाता है बकरीद का त्योहार, क्या है कुर्बानी का मतलब

Eid-ul-Adha 2020: इस्लाम धर्म में विश्वास करने वाले लोगों का एक प्रमुख त्यौहार है. रमजान के पवित्र महीने की समाप्ति के लगभग 70 दिनों बाद इसे मनाया जाता है.

Published: July 28, 2020 11:27 AM IST

By India.com Hindi News Desk | Edited by Deepika Negi

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नई दिल्ली: बकरीद (Eid-ul-Adha 2020) जिसका मतलब है कुर्बानी की ईद. इस्लाम धर्म में विश्वास करने वाले लोगों का एक प्रमुख त्यौहार है. रमजान के पवित्र महीने की समाप्ति के लगभग 70 दिनों बाद इसे मनाया जाता है. इस्लाम मजहब की मान्यता के अनुसार, कहा जाता है अल्लाह ने हजरत इब्राहिम से सपने में उनकी सबसे प्रिय चीज की कुर्बानी मांगी थी. हजरत इब्राहिम अपने बेटे से बहुत प्यार करते थे, लिहाजा उन्होंने अपने बेटे की कुर्बानी देने का फैसला किया. अल्लाह के हुक्म की फरमानी करते हुए हजरत इब्राहिम ने जैसे ही अपने बेटे की कुर्बानी देनी चाही तो अल्लाह ने एक बकरे की कुर्बानी दिलवा दी. कहते हैं तभी से बकरीद का त्योहार मनाया जाने लगा.

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बकरीद का त्यौहार हिजरी के आखिरी महीने जुल हिज्ज में मनाया जाता है. पूरी दुनिया के मुसलमान इस महीने में मक्का सऊदी अरब में एकत्रित होकर हज मनाते है. ईद उल अजहा भी इसी दिन मनाई जाती है. वास्तव में यह हज की एक अंशीय अदायगी और मुसलमानों के भाव का दिन है. दुनिया भर के मुसलमानों का एक समूह मक्का में हज करता है बाकी मुसलमानों के अंतरराष्ट्रीय भाव का दिन बन जाता है.

इन जानवरों की दी जाती है कुर्बानी
बकरीद के दिन मुस्लिम बकरा, भेड़, ऊंट जैसे किसी जानवर की कुर्बानी देते हैं. इसमें उस पशु की कुर्बानी नहीं दी जा सकती है जिसके शरीर का कोई हिस्सा टूटा हुआ हो, भैंगापन हो या जानवर बीमार हो बकरीद के दिन कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है. एक खुद के लिए, दूसरा सगे-संबंधियों के लिए और तीसरे हिस्से को गरीब लोगों में बांटे जाता है.

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Published Date: July 28, 2020 11:27 AM IST