Eid-ul-fitr 2021: मुसलमानों का सबसे बड़ा त्योहार ईद उल फितर रमजान के महीने के खत्म होने पर मनाया जाता है. लेकिन पिछले साल की तरह इस साल भी कोरोना महामारी ने तबाही मचाई हुई है. इसे देखते हुए मुस्लिम धर्मगुरुओं ने तमाम लोगों से गुजारिश करते हुए कहा है कि सभी लोग घरों में ही ईद की नमाज पढ़, खुशियां मनाएं. Also Read - ईद मुबारक! WhatsApp के जरिए अपनों को इस तरह भेजें मुबारकबाद के स्टीकर्स, फॉलो करें ये स्टेप्स

इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, रमजान के बाद शव्वाल की पहली तारीख को ईद-उल-फितर मनाई जाती है. ईद के दिन सुबह की नमाज पढ़ इसकी शुरूआत हो जाती है. Also Read - Eid-Ul-Fitr 2021 Moon Sighting In India: ईद मुबारक! भारत में दिखा ईद का चांद, देखें Chand Raat की तस्वीरें

जामा मस्जिद के शाही ईमाम सईद अहमद बुखारी ने मुस्लिम समाज से अपील करते हुए कहा कि आगामी दिनों में मनाई जानी वाली ईद पर लोग अपने घरों में ही नमाज पढ़ें. ये जानलेवा बीमारी बहुत तेजी से फैल चुकी है. यह ऐसा कयामत का मंजर जिसे हमने आपने अपनी जिंदगी में कभी नहीं देखा. कई परिवारों ने अपने लोगों को खो दिया. Also Read - Eid 2021 Gift Ideas: ईद के मौके पर खुशियों में लगाएं चार चांद, दें ये खास तोहफे

कई लोग तो अपनों को कंधा भी नहीं दे सके, डॉक्टरों के मुताबिक अभी तीसरी लहर बाकी है. इसके लिए बहुत एहतियात की जरूरत है.

इस साल रमजान 13 अप्रैल से शुरू हुए थे, इसलिए ईद उल फितर 13 मई, गुरुवार या 14 मई, शुक्रवार को मनाई जा सकती है. हालांकि, चांद देखकर ही इसकी सही तारीख तय होगी.

नई दिल्ली के इमाम हाउस में मुख्य इमाम डॉक्टर इमाम उमेर अहमद इल्यासी ने अपील करते हुए कहा कि इस समय बेहद कठिन समय चल रहा है. मैं सभी लोगों ने गुजारिश करता हूं कि आप सभी लोग सरकार द्वारा जारी की गई गाइडलाइंस का पालन जरूर करें. मस्जिदों के अंदर चंद लोग ही नमाज पढ़ रहें है इसलिए आप बीते साल की तरह इस साल भी नियमों का पालन करें.

हालात बेकाबू हो गए है, अपने घरों में ही रहें. इस बात का भी ख्याल रखें कि आपको खुद के साथ अपनों की भी जान बचानी है.

दरअसल इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, रमजान के दौरान पाक मन से रोजे रखने वालों और नमाज अदा करने वालों के अल्लाह सारे गुनाह माफ कर देता है. वहीं ईद उल फितर के साथ ही रोजे भी खत्म हो जाते हैं.

ईद उल फितर के दिन लोग सुबह नए कपड़े पहनकर नमाज अदा करते हुए अमन और चैन की दुआ मांगते हैं.

इस्लामिक धर्मगुरु मौलाना राशिद फिरंगी महली ने लोगों से अपील की कि जिस तरह कोरोना बीमारी ने विकराल रूप ले रखा है, ऐसे में बेहतर यही है कि सभी लोग अपने घरों में ही रहें.

अपनों की जान बचाना हर किसी की जिम्मेदारी है, क्योंकि इस साल फिर महामारी खत्म नहीं हुई है ऐसे में लोगों की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है. तो हम साभी ज्यादा ज्यादा लोगों की मदद करें इस बात का भी ध्यान हम सभी को रखना है.

ईद-उल-फितर में मीठे पकवान (खासतौर पर सेंवईंयां) बनती हैं. लोग आपस में गले मिलकर अपने गिले-शिकवों को दूर करते हैं. घर आए मेहमानों की विदाई कुछ उपहार देकर की जाती है. इस्लामिक धर्म का यह त्योहार भाईचारे का संदेश देता है.
(एजेंसी से इनपुट)