नई दिल्ली: नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (KP  Sharma Oli) की ओर से राम मंदिर पर दिए गए बयान के कारण भारत में बवाल मच गया है. उनकी ओर से भगवान राम पर दिए गए बयान से अयोध्या के संत भड़के हुए हैं. पीएम केपी शर्मा ओली का दावा है कि भगवान् श्रीराम (Lord Rama) की नगरी अयोध्या  (Ayodhya) भारत (India) के उत्तर प्रदेश में नहीं बल्कि नेपाल (Nepal) के बाल्मिकी आश्रम के पास है. बाल्मिकी रामायण का नेपाली अनुवाद करने वाले नेपाल के आदिकवि भानुभक्त की जन्म जयन्ती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए ओली ने यह दावा किया. भारत और नेपाल के बीच बीते कुछ दिनों से तनाव का माहौल बना हुआ है. लेकिन इन दोनों देशों का नाता युगों पुराना रहा है. नेपाल के नागरिक भारत के मंदिरों में दर्शन के लिए आते रहे हैं और भारतीय नागरिक भी यहां के मंदिरों में दर्शन के लिए जाते रहे हैं. Also Read - अयोध्या में मिली ज़मीन पर मस्जिद के पक्ष में नहीं है मुस्लिम निकाय, कहा- हॉस्पिटल और स्कूल बने

ऐसे में आज हम आपको नेपाल की कुछ देवी देवताओं के प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं. आपको बता दें कि अपने आध्यात्मिक वातारवण की वजह से इसे देवी और देवताओं की भूमि भी कहा जाता है. शान्ति की तलाश में यहां हर साल अनेक देशी और विदेशी तीर्थयात्री आते हैं. आइए जानते हैं इन मंदिरों के बारे में. Also Read - अयोध्‍या के राम मंदिर का 1000 साल का होगा जीवन काल, तेज भूकंप से भी नहीं होगा नुकसान

ये हैं नेपाल के 5 प्रसिद्ध मंदिर (Top 5 Hindu Temples in Nepal)

पशुपतिनाथ मंदिर- पशुपतिनाथ मंदिर नेपाल की राजधानी काठमांडू से तीन किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में बागमती नदी के किनारे देवपाटन गांव में स्थित एक हिंदू मंदिर है. नेपाल के एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनने से पहले यह मंदिर राष्ट्रीय देवता, भगवान पशुपतिनाथ का मुख्य निवास माना जाता था. यह मंदिर यूनेस्को विश्व सांस्कृतिक विरासत स्थल की सूची में सूचीबद्ध है. पशुपतिनाथ में आस्था रखने वालों (मुख्य रूप से हिंदुओं) को मंदिर परिसर में प्रवेश करने की अनुमति है. गैर हिंदू आगंतुकों को इसे बाहर से बागमती नदी के दूसरे किनारे से देखने की अनुमति है. यह मंदिर नेपाल में शिव का सबसे पवित्र मंदिर माना जाता है. Also Read - नेपाल ने भारतीय नागरिकों के लिए प्रवेश स्थल 20 से घटाकर किए आधे, उड़ानों पर रोक भी बढ़ाई

मुक्तिनाथ- मुक्तिनाथ वैष्‍णव संप्रदाय के प्रमुख मंदिरों में से एक है. यह तीर्थस्‍थान शालिग्राम भगवान के लिए प्रसिद्ध है. शालिग्राम दरअसल एक पवित्र पत्‍थर होता है जिसको हिंदू धर्म में पूजनीय माना जाता है. यह मुख्‍य रूप से नेपाल की ओर प्रवाहित होने वाली काली गण्‍डकी नदी में पाया जाता है. जिस क्षेत्र में मुक्तिनाथ स्थित हैं उसको मुक्तिक्षेत्र’ के नाम से जाना जाता हैं. हिंदू धार्मिक मान्‍यताओं के अनुसार यह वह क्षेत्र है, जहां लोगों को मुक्ति या मोक्ष प्राप्‍त होता है. मुक्तिनाथ की यात्रा काफी मुश्किल है. फिर भी हिंदू धर्मावलंबी बड़ी संख्‍या में यहां तीर्थाटन के लिए आते हैं. यात्रा के दौरान हिमालय पर्वत के एक बड़े हिस्‍से को लांघना होता है. यह हिंदू धर्म के दूरस्‍थ तीर्थस्‍थानों में से एक है.

मनकामना- मनोकामना/मनकामना भगवति गोरखा में स्थित मनोकामना मन्दिर भी एक महत्वपूर्ण देवीस्थान शक्तिपीठ माना जाता है. मन कि कामना पूरी होती है ऐसा माने जाने के कारण इस भगवती का नाम मनोकामना पड़ गया. राम शाह की रानी स्वयं मनोकामना भगवती का अवतार थीं यह जनविश्वास है. दशहरे में पूजा करने आने वाले श्रद्धालुओं कि बहुत बड़ी भीड़ लगती है. यहाँ प्रत्येक अष्टमी के दिन बली चढ़ाने की परंपरा है. मनोकामना के दर्शन से मनोकांक्षा पूरी होती है ऐसा धार्मिक विश्वास है. मनकामना मंदिर जाने के लिए काठमांडू से पोखरा वाले रास्ते पर जाएं और मुगलिंग से 26 किलोमीटर पहले उत्तर कर सड़क किनारे ही मनोकामना देवी के मंदिर का प्रवेश द्वार है.

स्वयंभूनाथ स्तूप- स्वयंभूनाथ काठमाण्डू नगर के पश्चिम में एक पहाड़ी पर स्थित एक प्राचीन बौद्ध स्तूप है. बौद्ध धर्म के अनुयायी नेवारी लोगों के दैनिक जीवन में स्वयंभूनाथ का केन्द्रीय स्थान है. यह स्थान उनके लिये सबसे पवित्र बौद्ध स्थल है. तिब्बती लोगों तथा तिब्बती बौद्ध-धर्म के अनुयायियों के लिये बौद्धनाथ के बाद इसका ही स्थान है. विश्व धरोहर में सम्मिलित स्वयंभू विश्‍व के सबसे भव्य बौद्ध स्थलों में से एक है. इसका संबंध काठमांडू घाटी के निर्माण से जोड़ा जाता है. काठमांडू से तीन किलोमीटर पश्चिम में घाटी से 77 मी. की ऊंचाई पर स्थित है स्वयंभू. इसके चारों ओर बनी आंखों के बार में माना जाता है कि ये गौतम बुद्ध की हैं जो चारों दिशाओं में देख रही हैं.

बुदानिकंथा- यह व‍िष्‍णु भगवान का मंदिर है. मंद‍िर का नाम बुदानिकंथा है. मंदिर को लेकर ऐसी कथा है क‍ि यह मंदिर राज पर‍िवार के लोगों के शापित है. शाप के डर की वजह से राज परिवार के लोग इस मंदिर में नहीं जाते. यह काठमांडू से 8 किलोमीटर दूरी पर शिवपुरी पहाड़ी की तलहटी में स्थित है. बुदानिकंथा मंदिर भगवान विष्णु जी का मंदिर है और इस मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार यहां आकर भगवान विष्णु जी के दर्शन करने से सारी मनोकामान पूरी हो जाती हैं. बुदानिकंथा मंदिर में भगवान विष्णु जी सोती हुई मुद्रा में विराजमान हैं. इस मंदिर में पानी का कुंड है और उसपर विष्णु भगवान की विशाल काले रंग की मूर्ति है.