श्राद्ध पक्ष चल रहे हैं. इस समय में शुभ कार्य वर्जित होते हैं. लोग नई वस्तुएं, नए परिधान नहीं खरीदते और ना ही पहनते हैं. पर इस पक्ष में आने वाली अष्‍टमी तिथि को बेहद शुभ माना जाता है.

श्राद्ध पक्ष में आने वाली अष्टमी को लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है. इसे गजलक्ष्‍मी व्रत कहा जाता है. इस दिन सोना खरीदने का भी विशेष महत्व है.

मान्यता है कि इस दिन खरीदा सोना आठ गुना बढ़ता है. इस दिन हाथी पर सवार मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है.

कैसे करें पूजन
गजलक्ष्‍मी व्रत का पूजन शाम के समय किया जाता है. शाम के समय स्नान कर पूजास्‍थान पर लाल कपड़ा बिछाएं. केसर मिले चन्दन से अष्टदल बनाकर उस पर चावल रखें. फिर जल से भरा कलश रखें.

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अब कलश के पास हल्दी से कमल बनाएं. इस पर माता लक्ष्मी की मूर्ति रखें. मिट्टी का हाथी बाजार से लाकर या घर में बनाकर उसे स्वर्णाभूषणों से सजाएं. नया खरीदा सोना हाथी पर रखने से पूजा का विशेष लाभ मिलता है.

इस दौरान माता लक्ष्मी की मूर्ति के सामने श्रीयंत्र भी रखें. कमल के फूल से मां का पूजन करें.

सोने-चांदी के सिक्के, मिठाई, फल भी रखें. मां लक्ष्‍मी के इन नामों का जाप करें.

– ॐ आद्यलक्ष्म्यै नम:
– ॐ विद्यालक्ष्म्यै नम:
– ॐ सौभाग्यलक्ष्म्यै नम:
– ॐ अमृतलक्ष्म्यै नम:
– ॐ कामलक्ष्म्यै नम:
– ॐ सत्यलक्ष्म्यै नम:
– ॐ भोगलक्ष्म्यै नम:
– ॐ योगलक्ष्म्यै नम:

इसके बाद धूप और घी के दीप से पूजा कर नैवेद्य या भोग लगाएं.

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