Ganesh Chaturthi 2018 Puja Vidhi: 13 सितंबर 2018 को गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी. गणेश चतुर्थी के मौके पर लोग अपने घर में गणेश की प्रतिमा को स्थापित करते हैं और उनकी विधिवत पूजन करते हैं ऐसी मान्यता है कि इस दौरान गणेश जी अपने भक्तों के आसपास ही होते हैं और उनकी पूजा स्वीकार करते हैं. गणेश जी अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. Also Read - Ganesh Chaturthi 2019: सहवाग-हरभजन ने दी शुभकामनाएं, ये मैसेज रहा सबसे हिट

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भारत में गणेश चतुर्थी बहुत ही धूमधाम से मनाई जाती है. खासतौर से महाराष्ट्र, गोवा, केरल और तमिलनाडु में यह पर्व बड़े स्तर पर मनाया जाता है. भगवान गणेश को लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं. इसमें एक कहानी उनके जन्म को लेकर है. ऐसी मान्यता है कि भगवान गणेश को मां पार्वती ने अपनी शरीर के मैल से बनाया था. मां पार्वती जब स्नान करने जा रही थीं, तभी उन्होंने गणेश को आदेश दिया कि वह जब तक स्नान कर ना लौटें, तब तक दरवाजे पर पहरा दें और किसी को भी अंदर ना आने दें.

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लेकिन तभी भगवान शंकर वहां पहुंच गए और उन्होंने दरवाजे से गणेश को हटने को कहा. भगवान शंकर के काफी आग्रह करने के बाद भी गणेश ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया. इस पर भगवान शंकर क्रोधित हो गए और उन्होंने भगवान गणेश का सिर काट दिया. इतने में मां पार्वती बाहर आ गईं. जब उन्होंने अपने पुत्र का सिर कटा हुआ पाया तो वह क्रोधित हो गईं. तब भगवान शंकर ने मां पार्वती को यह वचन दिया कि वह गणेश को नया जीवन देंगे. इसके बाद ही गणेश को हाथी का सिर लगाया गया. इसलिए भगवान गणेश को गजानन भी कहा जाता है.

गणेश चतुर्थी 2018 शुभ मुहूर्त:

चतुर्थी कब से शुरू हो रही है: बुधवार 12 सितंबर को शाम 4:07 बजे के बाद चतुर्थी लग जाएगी.

चतुर्थी कब तक रहेगी: गुरुवार 13 सितंबर को दोपहर 2:51 बजे तक चतुर्थी रहेगी.

गणेश पूजन के लिए मध्याह्न मुहूर्त: गुरुवार 13 सितंबर को सुबह 11:02:34 से 13:31:28 तक पूजन का शुभ मुहूर्त है.

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पूजन के लिए शुभ अवधि : 2 घंटे 28 मिनट

राहुुकाल: 13 सितंबर को 1:30 से 3:00 बजे तक राहुुकाल रहेगा, इसमें पूजा नहीं होगी. राहुुकाल से पहले-पहले पूजन करें.

चन्द्र दर्शन नहीं करने का समय: 12 सितंबर 2018 को  16:08:43 से 20:32:00 तक

चन्द्र दर्शन नहीं करने का समय : 13 सितंबर 2018 को 09:31:59 से 21:11:00 तक

गणेश जी की मूर्ति स्थापित कैसे करें:

गणेश जी को लेकर जब आएं, उससे पहले पूरे घर को साफ कर लें और पूजा की थाली तैयार कर लें. भगवान गणेश का स्वागत करने के लिए पहले दरवाजे पर ही उनकी आरती की जाती है. गणपति मंत्र उच्चारण करें और शुभ मुहूर्त में गणेश जी मूर्ति की स्थापना पूजा स्थान पर करें. ध्यान रहे कि भगवान गणेश की स्थापना राहुकाल में नहीं करना चाहिए.

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घर के सभी सदस्य मिलकर भगवान गणेश की आरती करें और भगवान गणेश को विभिन्न पकवान से सुसज्जित भोजन की थाल चढ़ाएं. भगवान गणेश को मोदक और लड्डू अति प्रिय है, इसलिए गणपति को मोदक भी जरूर चढ़ाएं. पंच मेवा रखें.

गणेश जी की स्थापना के समय ही गणेश जी के स्थान के उलटे हाथ की तरफ जल से भरा हुआ कलश चावल या गेहूं के ऊपर स्थापित कर दें. धूप व अगरबत्ती लगाएं. कलश के मुख पर मौली बांधें एवं आमपत्र के साथ एक नारियल उसके मुख पर रखें.

ध्यान रहे कि नारियल की जटाएं ऊपर की ओर ही रहे. घी एवं चंदन को ताम्बे के कलश में नहीं रखना चाहिए. गणेश जी के स्थान के सीधे हाथ की तरफ घी का दीपक एवं दक्षिणावर्ती शंख रखना चाहिए. सुपारी गणेश भी रखें.

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गणेश चतुर्थी पूजन विधि :

1. पूजन की शुरुआत में हाथ में अक्षत, जल एवं पुष्प लेकर स्वस्तिवाचन, गणेश ध्यान एवं समस्त देवताओं का स्मरण करें.

2. अब अक्षत एवं पुष्प चौकी पर समर्पित करें. इसके पश्चात एक सुपारी में मौली लपेटकर चौकी पर थोड़े-से अक्षत रख उस पर वह सुपारी स्थापित करें.

3. भगवान गणेश का आह्वान करें. गणेश आह्वान के बाद कलश पूजन करें.

4. कलश उत्तर-पूर्व दिशा या चौकी की बाईं ओर स्थापित करें. कलश पूजन के बाद दीप पूजन करें.

5. इसके बाद पंचोपचार या षोडषोपचार के द्वारा गणेश पूजन करें. षोडषोपचार पूजन इस प्रकार होता है

– सबसे पहले आह्वान करते हैं.

– इसके बाद स्थान ग्रहण कराते हैं.

– हाथ में जल लेकर मंत्र पढ़ते हुए प्रभु के चरणों में अर्पित करते हैं.

– चंद्रमा को अर्घ्य देने की तरह पानी छोड़ें.

– मंत्र पढ़ते हुए 3 बार जल चढ़ाएं.

– पान के पत्ते या दूर्वा से पानी लेकर छींटें मारें.

– सिलेसिलाए वस्त्र, पीताम्बरी कपड़ा या कलावा चढ़ाएं.

– जनेऊ, हार, मालाएं, पगड़ी आदि चढ़ाएं.

– इत्र छिड़कें या चंदन अर्पित करें. फूल, धूप, दीप, पान के पत्ते पर फल, मिठाई, मेवे आदि चढ़ाएं.

6. परंपरागत पूजन करें और आरती करें.

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