Ganga Dussehra 2018: हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली दशमी को गंगा दशहरा मनाया जाता है. भागीरथ के कठिन तप के बाद मां गंगा का आज के ही दिन धरती पर अवतरण हुआ था. मां गंगा का अवतरण हस्त नक्षत्र में हुआ था. आज के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक गंगा जल से करने का विशेष महत्व है. ज्योतिष गुरुओं के अनुसार गंगा इतनी पवित्र नदी है कि आज कि दिन इसमें स्नान मात्र करने से 10 तरह के पाप नष्ट हो जाते हैं. दस पापों को हरने के कारण ही इसे गंगा दशहरा कहा जाता है. इसमें 3 कायिक पाप होते हैं, 4 वाचिक और 3 मानसिक पाप होते हैं.Also Read - दिग्‍विजय सिंह बोले- सरस्वती शिशु मंदिर बचपन से लोगों के दिल और दिमाग में दूसरे धर्मों के खिलाफ नफरत का बीज बोते हैं...

Also Read - Love Jihad in UP: पहचान छुपाकर हिंदू लड़की को धर्म परिवर्तन के लिए किया मजबूर, फिर निकला ये अंजाम

कायिक पाप का अर्थ होता है काया यानी हमारे शरीर से जुड़े पाप. वाचिक यानी वाणी संबंधी पाप और मानसिक पाप यानी जो आप अपनी सोच और मानसिकता से करते हैं. Also Read - Vaishakha Month 2021: आज से शुरू हुआ वैशाख का शुभ महीना, जानें इसका महत्व, पड़ेंगे 12 शुभ मुहूर्त

ऐसी मान्यता है कि आज के दिन गंगा स्नान और गंगा पूजन करने वाले व्यक्ति के ना केवल पाप नष्ट होते हैं, बल्कि उसकी मन की मुराद भी पूरी हो जाती है. जिन लोगों को संतान नहीं है, उन्हें संतान सुख प्राप्त होता है.

Ganga Dussehra 2018: इन 5 धार्मिक स्थलों पर गंगा की पूजा होती है खास, गंगा दशहरा पर यहां जरूर जाएं

मलमास में गंगा दशहरा

मलमास में गंगा दशहरा का आना बहुत शुभ होता है. जिस साल मलमास होता है, उस वर्ष मलमास में ही गंगा दशहरा मनाया जाता है. उस साल शुद्धमास में गंंगा दशहरा नहीं मनाया जाता. इस दिन पवित्र नदी में स्नान और पूजन करने की परंपरा है.

इस मंत्र का करें जाप

इस दिन मां गंगा को प्रसन्न करने और उनसे मनचाहा वरदान प्राप्त करने के लिए इस मंत्र का जाप करें. लेकिन ध्यान रहे कि इस मंत्र का जाप आपको गंगा स्नान के दौरान ही करना है.

ऊं नम: शिवाय नारायण्यै दशहरायै गंगायै नम:

इस मंत्र का जाप आप अपनी श्रद्धा अनुसार 1, 3, 5, 7, 11, 21 या 108 बार कर सकते हैं.