Ganga Dussehra 2018: ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को गंगा दशहरा मनाया जाता है. इस साल मलमास में आने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ गया है. आज के दिन ही मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था. आज पवित्र नदी गंगा में स्नान कर पूजन करने से सारे पापों का नाश होता है और रोग दोष दूर होते हैं. गंगा दशहरा के दिन हरिद्वार, ऋषिकेश, इलाहबाद (प्रयाग) और वाराणसी में  दूूूर दूर से लोग गंगा स्नान करने आते हैं. वैसे अमूमन लोग सूर्य उगने से पहले ही गंगा स्नान कर लेते हैं. लेकिन आप गंगा स्नान किसी भी वक्त कर सकते हैं वह शुभ ही होगा. गंगा दशहरा का व्रत करने से ना केवल मां गंगा प्रसन्न होती हैं, बल्कि इससे भगवान विष्णु और भगवान शंकर भी खुश होते हैं.

गंंगा दशहरा के दिन भगवान विष्णु और भगवान शंकर की भी विधिवत पूजा की जाती है. भगवान शंकर का गंगा जल से अभिषेक किया जाता है. आज के दिन जातक निर्जला व्रत रखते हैं और किसी जरूरतमंद को जल का घट दान करके फिर जल पीकर व्रत पूरी करते हैं.

गंगा दशहरा के दिन दान पुण्य का भी खास महत्व है. इस दिन जातक को केला, नारियल, अनार, सुपारी, खरबूजा, आम, जल भरी सुराई, हाथ का पंखा आदि वस्तुएं दान करनी चाहिए.

Ganga Dussehra 2018: इन 5 धार्मिक स्थलों पर गंगा की पूजा होती है खास, गंगा दशहरा पर यहां जरूर जाएं

इस तरह करें पूजन: 

अगर घर के करीब गंगा जी नहीं हैं तो किसी भी नदी या तालाब में स्नान करें या घर में ही स्नान कर गंगा जी का ध्यान करें.

स्नान करते वक्त नदी में 10 बार गोते लगाएं.

5 पुष्पांजलि अर्पित करें और भगीरथ का नाम मंत्र से पूजन करें.

गंगा दशहरा 10 पापों का नाश करने वाला होता है इसलिए पूजा में 10 प्रकार के फूल, दशांग धूप, 10 दीपक, 10 प्रकार के नैवेद्य, 10 तांबूल एवं 10 फल का प्रयोग करें.

10 ब्राह्मणों को 16 मुट्ठी जौ और तिल दक्षिणा में दें.

सत्तू का भी दान करें.

Ganga Dussehra 2018: आज गंगा स्नान से मिलेगी 10 पापों से मुक्ति

महत्व : 

स्कन्दपुराण में गंगा दशहरा के महत्व के बारे में बताया गया है. पुराण में कहा गया है कि गंगा पुराण को संवत्सरमुखी माना जाता है. इसलिए आज के दिन स्नान, दान और महत्व का खास महत्व है. आज के दिन गंगा में जरूर स्नान करना चाहिए और अर्घ्य देना चाहिए. ऐसा करने से 10 पाप नष्ट हो जाते हैं.

भविष्य पुराण में कहा गया है कि जो जातक गंगा दशहरा के दिन गंगा जी में खड़े होकर स्कंद पुराण में वर्णित गंगा दशहरा स्तोत्र को दस बार पढ़ता है तो हर मनोकामना पूर्ण होती है.