नई दिल्ली: 30 अप्रैल गुरुवार को वैशाख महीने के शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथि है. इसे गंगा सप्तमी के रूप में भी जाना जाता है. इस दिन गंगा स्नान का बहुत बड़ा महत्व होता है. लेकिन इस बार कोरोना वायरस के कारण लगे लॉकडाउन के चलते घर पर ही पानी में गंगा जल की कुछ बूंदे डालकर स्नान करें.

क्यों मनाई जाती है गंगा सप्तमी
माना जाता है कि इस दिन परमपिता ब्रह्मा के कमंडल से पहली बार गंगा अवतरित हुई थी और ऋषि भागीरथ की कठोर तपस्या से खुश होकर धरती पर आईं थीं. पौराणिक कथाओं के अनुसार मां गंगा का जन्म भगवान विष्णु के पैर में पैदा हुई पसीने की बूंदों से हुआ था. जबकि कुछ अन्य हिंदू मान्यताओं की मानें तो गंगा की उत्पत्ति ब्रह्मा जी के कमडंल से हुई थी.

धर्म ग्रंथों के अनुसार जब कपिल मुनि के श्राप से सूर्यवंशी राजा सगर के 60 हजार पुत्र भस्म हो गए तब उनके उद्धार के लिए राजा सगर के वंशज भगीरथ ने घोर तपस्या कर माता गंगा को प्रसन्न किया और धरती पर लेकर आए. गंगा के स्पर्श से ही सगर के 60 हजार पुत्रों का उद्धार हो सका. गंगा को मोक्षदायिनी कहा जाता है.

गंगा सप्तमी का शुभ मुहूर्त

सप्तमी तिथि प्रारम्भ – अप्रैल 29, 2020 को 15:12 बजे
सप्तमी तिथि समाप्त – अप्रैल 30, 2020 को 14:39 बजे

अवधि- 2 घंटे 39 मिनट

गंगा सप्तमी मध्याह्न मूहूर्त – 10:59 से 13:38

गंगा सप्तमी पर क्या करें
गंगा सप्तमी एक प्रकार से गंगा मैया के पुनर्जन्म का दिन है इसलिए इसे कई स्थानों पर गंगा जयंती के रूप में भी मनाया जाता है. गंगा सप्तमी के दिन गंगा स्नान का बहुत महत्व है. यदि गंगा मैया में स्नान करना संभव न भी हो तो गंगा जल की कुछ बूंदे साधारण जल में मिलाकर उससे स्नान किया जा सकता है. स्नानादि के पश्चात गंगा मैया की प्रतिमा का पूजन कर सकते हैं. भगवान शिव की आराधना भी इस दिन शुभ फलदायी मानी जाती है. इसके अलावा गंगा को अपने तप से पृथ्वी पर लाने वाले भगीरथ की पूजा भी कर सकते हैं. गंगा पूजन के साथ-साथ दान-पुण्य करने का भी फल मिलता है.